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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : तीन बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते नारायण चंदेल का ऐसा रहा है राजनीतिक सफर

Updated at : 29 Oct 2023 6:17 PM (IST)
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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : तीन बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते नारायण चंदेल का ऐसा रहा है राजनीतिक सफर

छत्तीसगढ़ बीजेपी के बड़े नेताओं में एक हैं नारायण चंदेल. वर्ष 2022 से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं. जांजगीर-चांपा से विधायक चुने गए हैं. अब तक तीन बार विधायक बन चुके हैं. जानें कैसा रहा है उनका अब तक का राजनीतिक सफर.

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नारायण चंदेल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बड़े नेता हैं. 18 अगस्त 2022 से छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. 90 के दशक में ही उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया था. वर्ष 1991-92 में वह बाल संरक्षण गृह के सदस्य बने. इसी साल नगर पालिका परिषद की परामर्शदातृ समिति के सदस्य बनाए गए. जिला विकलांग एवं पुनर्वास समिति के सदस्य के अलावा दीनदयाल अंत्योदय समिति के भी सदस्य इसी दौरान रहे. वर्ष 1994 से वर्ष 1996 तक नारायण चंदेल भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश मंत्री रहे. वर्ष 1996 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया. इस पद पर वह वर्ष 1998 तक रहे. वर्ष 1996 से 1998 तक वह दक्षिण पूर्व रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे.

1998 में पहली बार विधानसभा पहुंचे नारायण चंदेल

नारायण चंदेल वर्ष 1998 में पहली बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए. इसके बाद वर्ष 2008 और वर्ष 2018 में भी विधायक बने. इस तरह नारायण चंदेल अब तक तीन बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं. वर्ष 2000 में उन्हें भाजपा प्रदेश परिषद का सदस्य एवं जिला महामंत्री बनाया गया. इसी साल वह भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य बने. इसके बाद 2001-02 में वह छत्तीसगढ़ विधानसभा की लोक लेखा समिति, विशेषाधिकार समिति के साथ-साथ प्रश्न एवं संदर्भ समिति के भी सदस्य रहे. इस दौरान उन्हें बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी के प्रदेश महामंत्री की भी जिम्मेदारी दी गई.

विधानसभा की कई समितियों में रहे सदस्य

वर्ष 2002-03 में नारायण चंदेल को छत्तीसगढ़ विधानसभा की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के कल्याण संबंधी समिति और सदस्य सुविधा एवं सम्मान समिति का सदस्य बनाया गया. वर्ष 2003-04 में उनको विधानसभा की विशेषाधिकार समिति, सदस्य सुविधा एवं सम्मान समिति का सदस्य नियुक्त किया गया. वर्ष 2007-08 में वह अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बने. इसी दौरान वह गुरु घासीदास विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य भी रहे. इसके अलावा सांस्कृतिक विकास मंडल जांजगीर के संरक्षक और युवा खेल विकास परिषद के आजीवन सदस्य बने.

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सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के सभापति रहे चंदेल

वर्ष 2009-10 में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता को छत्तीसगढ़ विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का सभापति बनाया गया. इस दौरान वह प्रश्न एवं संदर्भ समिति और सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य नियक्त किए गए. वर्ष 2010-11 में उनको छत्तीसगढ़ विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया. इस दौरान वह सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के सभापति रहे. कार्य मंत्रणा समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य रहे. इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ विधानसभा में सामान्य प्रयोजन समिति के भी सदस्य रहे.

कार्यमंत्रणा समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य रहे

वर्ष 2011 से वर्ष 2014 के बीच वह छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य रहे. इसके अलावा सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य भी रहे. वर्ष 2011-12 में उनको रोगदा जलाशय हस्तांतरित करने संबंधी जांच हेतु गठित सदन समिति का सभापति नियुक्त किया गया. वर्ष 2019 से वर्ष 2021 तक वह विधानसभा के सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति, गैर सरकारी सदस्यों के विधेयकों एवं संकल्पों संबंधी समिति के सदस्य बनाए गए.

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18 अगस्त 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने

नारायण चंदेल को 18 अगस्त 2022 को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई. तब से अब तक वह इस पद पर हैं. 19 अप्रैल 1965 को जांजगीर-चांपा जिले के नैला में जंगीराम चंदेल के घर उनका जन्म हुआ. 6 दिसंबर 1989 को प्रमिला चंदेल से उनका विवाह हुआ. नारायण-प्रमिला की तीन संतानें हैं. इनमें एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं. स्नातक तक पढ़े लिखे नारायण चंदेल ने अपना व्यवसाय कृषि बताया है. पर्यटन, साहित्य और भाषण में उनकी रुचि है. उन्होंने नेपाल, थाईलैंड और सिंगापुर की यात्रा की है.

2018 में तीसरी बार विधायक बने बीजेपी नेता नारायण चंदेल

वर्ष 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में नारायण चंदेल ने बीजेपी के टिकट पर जांजगीर-चांपा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और वह तीसरी बार विधायक चुने गए थे. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के मोतीलाल देवांगन को पराजित किया था. नारायण चंदेल को 54040 वोट मिले थे, जबकि मोतीलाल देवांगन को 49,852 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी के व्यास नारायण कश्यप रहे थे. उन्हें 33505 वोट मिले, जबकि चौथे स्थान पर आम आदमी पार्टी (आप) के संजय कुमार शर्मा रहे, जिन्हें 1538 वोट मिले थे.

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जांजगीर-चांपा में नारायण चंदेल को मिले थे 1,47,119 वोट

जांजगीर-चांपा में 2018 में कुल 2,03,330 वोटर थे. इनमें से 1,47,119 वोटर्स ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. इस तरह यहां 72.35 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें से 36.73 फीसदी वोट पाकर चंदेल पहले नंबर पर रहे थे. मोतीलाल देवांगन को 33.89 फीसदी, व्यास नारायण कश्यप को 22.77 फीसदी और संजय कुमार शर्मा को 1.05 फीसदी वोट मिले थे.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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