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इस योजना ने बदली झारखंड की महिला किसानों की जिंदगी, 17 हजार की लागत से शुरू की खेती, आज कमा रही है इतना

Updated at : 23 Apr 2022 8:54 AM (IST)
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इस योजना ने बदली झारखंड की महिला किसानों की जिंदगी, 17 हजार की लागत से शुरू की खेती, आज कमा रही है इतना

चास हाट योजना से जुड़ कर माया देवी ने खेती की शुरूआत की आज की तारीख में उसे 55,050 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ. उसने 50 डिसमिल जमीन पर सूक्ष्म टपक सिंचाई के तहत उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के जरिये फूलगोभी, परवल समेत कई सब्जियों की खेती की.

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रांची: पाकुड़ जिला के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत बलिया पतरा गांव की रहनेवाली माया देवी किसी तरह से अपना घर चलाती थी. बाद में माया देवी चास हाट से जुड़ी. उसने 50 डिसमिल जमीन पर सूक्ष्म टपक सिंचाई के तहत उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के जरिये फूलगोभी, परवल समेत कई सब्जियों की खेती की. अब वह अच्छी आमदनी कर रही है.

माया देवी कहती है थी कि पहले सिंचाई, सही बीज और खाद के अभाव में सही तरीके से खेती नहीं हो पाती थी. लेकिन, चास हाट की मदद से पिछले सीजन में 17,000 रुपये की लागत से सब्जियों की खेती कर लागत निकालने के बाद उसे 55,050 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ. इस विधि से खेती करने के बाद अब परिवार की स्थिति बदली जा सकती है.

4.5 करोड़ रुपये में बिकी सब्जियां :

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर शुरू की गयी चास हाट पहल के जरिये वित्तीय वर्ष 2021-22 में पाकुड़ के 7,803 किसानों ने 1712 एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती शुरू की. किसानों ने कम समय में करीब 266 मीट्रिक टन सब्जियों का उत्पादन किया. इन सब्जियों को लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये में बेचा गया. चास हाट योजना के अंतर्गत अब तक जिला के करीब 8000 किसानों व 5000 एकड़ भूमि चिह्नित करते हुए चास हाट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया गया है.

बीज से कुआं तक का मिला लाभ :

चास हाट के जरिये जिले के विभिन्न विभागों की खेती की योजनाओं का लाभ समेकित रूप से सखी मंडल की बहनों को दिया जा रहा है. सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए भूमि संरक्षण, डीप बोरिंग व पंप सेट उपलब्ध कराया जा रहा है. टपक सिंचाई योजना के जरिये किसानों की मदद की जा रही है. मनरेगा से कूपों की व्यवस्था की जा रही है.

Posted By: Sameer Oraon

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