Chaitra Navratri 2023, Maa Bharamacharini Puja: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Chaitra Navratri 2023, Maa Bharamacharini Puja: आज चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना में माता के भक्त लीन हैं. मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वालों को अपने कार्य में सदैव सफलता मिलती है. जानें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र आदि के बारे में
Chaitra Navratri 2023 Day 2, Maa Bharamacharini Puja: आज चैत्र नवरात्रि दे दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जा रही है. धर्म शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तपस्या और वैराज्ञ्य की देवी माना जाता है. मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वालों को अपने कार्य में सदैव सफलता मिलती है. जानें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा- विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और कथा क्या है?
चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि शुरू – 22 मार्च 2023, रात 08.20
चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि समाप्त – 23 मार्च 2023, रात 06.20
शुभ (उत्तम मुहूर्त) – सुबह 06.22 – सुबह 0754
लाभ (उन्नति मुहूर्त) – दोपहर 12.28 – दोपहर 01.59
मां ब्रहमचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लें, फिर पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें.
घर के मंदिर में दीप जलाएं.
मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें.
अब मां दुर्गा को अर्घ्य दें.
मां दुर्गा को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं.
मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल के फूल पसंद हैं. इन्हीं फूलाें से माता की पूजा करें.
माता को भोग लगाएं.
मां ब्रह्मचारिणी को भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं.
मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्यंजन अति प्रिय होते हैं. इसलिए आप उन्हें दूध से बने व्यंजनों का भोग भी लगा सकते हैं.
धूप और दीपक प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें.
शास्त्रों में मां ब्रह्माचारिणी को ज्ञान और तप की देवी माना जाता है. कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करते हैं, उन्हें धैर्य के साथ और ज्ञान की प्राप्ति होती है. ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली. इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली. मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है.
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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