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बिकरू कांड: तीन साल बाद भी नहीं सुलझा जमीन का विवाद, आठ पुलिसकर्मी हुए शहीद, सिर्फ खुशी दुबे को मिली जमानत

Updated at : 02 Jul 2023 3:15 PM (IST)
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बिकरू कांड: तीन साल बाद भी नहीं सुलझा जमीन का विवाद, आठ पुलिसकर्मी हुए शहीद, सिर्फ खुशी दुबे को मिली जमानत

कानपुर के बिकरू कांड के तीन साल पूरे हो चुके हैं. इस हत्याकांड को लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं. खास बात है कि लोगों को भले ही विकास दुबे के आतंक से मुक्ति मिल गई हो और उन्होंने राहत की सांस ली हो. लेकिन, शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों के जख्म अभी भी ताजा हैं. वह इस दर्द से उबर नहीं पाए हैं.

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Kanpur: कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड की यादें आज भी लोगों के जहन में ताजा हैं. बिकरू कांड की रविवार को तीसरी बरसी मनाई जा रही है. तीन साल पहले आज ही के दिन 2 जुलाई 2020 को चौबेपुर थाना क्षेत्र में बिकरू कांड हुआ था. इस मामले में जहां अभी तक आरोपियों में सिर्फ खुशी दुबे की जमानत हुई, वहीं जिस जमीन को लेकर आठ लोगों की मौत हुई, उसका विवाद आज भी कायम है.

तीन साल पहले गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने के लिए पुलिस केे दबिश देने की सूचना लीक हो गई. इसके बाद जब पुलिस बिकरू पहुंची तो जेसीबी से उसका रास्ता रोका गया. जब तक पुलिस संभलती गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने गुर्गों के साथ में मिलकर पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. इस हमले में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए. वहीं छह से ज्यादा घायल हुए. ग्रामीण इस घटना को यादकर आज भी दहल जाते हैं.

पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद एक्शन में आई यूपी पुलिस ने 3 जुलाई की सुबह से ताबड़तोड़ एनकाउंटर शुरू किए, जिसमें मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत छह लोगों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था. जबकि 48 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर अब तक जेल भेजा जा चुका है.

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इस कांड के पीछे की मुख्य वजह छह बीघा जमीन का विवाद सामने आया था, इसी को लेकर यह झग़ड़ा शुरू था. बिकरू कांड की मुख्य वजह जादेपुर निवासी राहुल तिवारी की ओर से विकास दुबे व अन्य के खिलाफ कराई गई एफआईआर थी. इसे लेकर दबिश देने के लिए पुलिस टीम दो जुलाई 2020 की रात बिकरू पहुंची थी.

जादेपुर निवासी राहुल तिवारी की शादी पड़ोस के गांव मोहनी निवादा निवासी लल्लन शुक्ला की बेटी के साथ हुई थी. लल्लन की केवल तीन बेटियां हैं, जिसमें दो की शादी हो चुकी है. लल्लन के जीवन काल से उनका भांजा सुनील उनके साथ रहने लगा था. सुनील की शादी विकास दुबे के भतीजे शिवम दुबे की बहन से हुई थी. लल्लन की मौत के बाद सुनील ने दावा किया कि मरने से पहले मामा उसे साढ़े छह बीघा जमीन दान में दे गए हैं. इसी आधार पर सुनील ने जमीन का बैनामा भी अपने नाम से करवा लिया था.

राहुल तिवारी ने इस बैनामे को कोर्ट में चुनौती दी है. करोड़ों की कीमत वाली जमीन पर विकास दुबे की नीयत भी खराब हुई और यही बिकरू कांड की सबसे बड़ी वजह बन गई. राहुल के मुताबिक, अधिकारी चाहें तो उसकी जमीन का विवाद भी खत्म हो सकता है, मगर कोई सुनवाई ही नहीं कर रहा है.

आज भी नहीं सुलझा मसला

गैंगस्टर विकास दुबे के मुठभेड़ में ढेर होने के बाद उन तमाम जमीनों के विवाद समाप्त हो गए थे, जिन्हें लेकर बरसों से मामलो में आरोप प्रत्यारोप चल रहे थे. मगर, संयोग देखिए कि जहां अन्य जमीनों के विवाद जिला प्रशासन ने आगे बढ़कर खत्म करा दिए, वहीं उस जमीन का मसला अब तक उलझा हुआ है, जिसके लिए इतनी जानें चली गईं. उस जमीन पर कब्जा राहुल तिवारी का है. लेकिन, जमीन अभी शिवम दुबे के बहनोई सुनील के नाम पर ही है.

इन जमीनों का खत्म हुआ विवाद

विकास दुबे से जुड़े तमाम जमीनों के विवाद थे, जिसमें तारा चंद्र इंटर कालेज के प्राचार्य सिद्धेश्वर पांडेय की पांच करोड़ की जमीन सबसे अहम थी. अब दोबारा से पांडेय परिवार के पास इस जमीन का स्वामित्व आ गया है. शिवली के संतोष मिश्रा की छह बीघा जमीन पर विकास दुबे ने 20 साल पहले कब्जा कर लिया था. यह जमीन भी अब उनको मिल गई है. इसी तरह से उधारी के बहाने विकास दुबे ने मुन्ना यादव की सात बीघा जमीन कब्जा ली थी. इसमें से चार बीघा जमीन उन्हें वापस मिल गई है और जो जमीन उसने विकास के नाम कर दी थी, उसे वापस लेने के लिए उन्होंने अदालत में केस कर दिया है.

पूरे केस में 43 आरोपी जेल में

बिकरू कांड के मुख्य केस में 36 आरोपी बनाए गए थे, जिसमें से सिर्फ खुशी दुबे को ही जमानत मिली है. इसके साथ ही बिकरू कांड से जुड़े अन्य मुकदमों में 11 आरोपियों में से सिर्फ तीन को जमानत मिली है. पूरे केस में अभी भी 43 आरोपी जेल में बंद हैं. बिकरू कांड के ठीक बाद विकास दुबे का करीबी जय वाजपेई पुलिस के हत्थे चढ़ा था. जय वाजपेई ने विकास और उसके गुर्गों को फरार कराने के लिए तीन गाड़ियों का इंतजाम किया था. इसके साथ ही उसने कैश और जिदां कारतूस भी मुहैया कराए थे.

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