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Ahoi Ashtami 2022 LIVE Updates: अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और तारा निकलने का समय

Updated at : 17 Oct 2022 5:27 PM (IST)
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Ahoi Ashtami 2022 LIVE Updates: अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और तारा निकलने का समय

Ahoi Ashtami 2022 LIVE Updates: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है. इस दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की अराधना की जाती है. यहां जानिये अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, तारा देखने का समय, व्रत कथा समेत पूरी डिटेल्स.

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5:27 PM. 17 Oct 225:27 PM. 17 Oct

अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Auspicious Time)

अहोई अष्टमी 17 अक्तूबर सोमवार की सुबह 9:29 बजे से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 11:57 बजे तक रहेगा. पूजा का शुभ मुहूर्त 17 अक्तूबर को शाम 5:57 बजे से रात 7:12 बजे तक है. तारा देखने का समय शाम 6:20 बजे तक है. जबकि चंद्रोदय रात 11:35 बजे होगा.

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

अहोई अष्टमी में इस मंत्र का करें जाप

अहोई अष्टमी से 45 दिनों तक ‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः’ का 11 माला जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि संतान कामना की इच्छा रखने वाले लोगों की भी इच्छा पूरी हो जाती है.

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

अहोई अष्टमी में गणेश जी की पूजा का है विशेष महत्व

अहोई अष्टमी के दिन तारों को अर्घ्य देते हैं. तारों के निकलने के बाद ही अपने उपवास को तोड़ें.

अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा सुनते समय 7 तरह के अनाज अपने हाथ में रखें. पूजा के बाद इस अनाज को किसी गाय को खिला दें.

अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय बच्चों को अपने पास बिठाएं और अहोई माता को भोग लगाने के बाद वो प्रसाद अपने बच्चों को जरूर खिलाएं.

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

शुभ समय (Ahoi Ashtami Auspicious Time, Shubh Muhurat)

अष्टमी तिथि का आरंभ- हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 17 अक्टूबर 2022 को सुबह 09 बजकर 29 मिनट से हो जाएगा, जो 18 अक्टूबर 2022 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक बना रहेगा

पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 05 बजकर 50 मिनट से लेकर 07 बजकर 05 मिनट तक बताया जा रहा है

तारों को देखने का समय- 17 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 13 मिनट तक

अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय- 17 अक्टूर की रात 11 बजकर 24 मिनट पर

10:30 AM. 17 Oct 2210:30 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी पर बरतें सावधानियां

इस पूजा में खास कर महिलाएं ज्यादा ध्यान दें. आज के दिन बिना स्नान किए पूजा-अर्चना ना करें. इस दिन महिलाओं को मिट्टी से जुड़े किसी तरह का कार्य करने से बचना चाहिए. इस दिन काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र का धारण न करें.

10:30 AM. 17 Oct 2210:30 AM. 17 Oct

अहोई पर तारे निकलने का समय

इस साल अहोई अष्टमी सोमवार यानी 17 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 29 मिनट से लेकर मंगलवार, 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक रहेगी. अहोई अष्टमी पर तारे देखकर अर्घ्य देने का विधान है.

10:30 AM. 17 Oct 2210:30 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी के दिन राधाकुंड की हुई थी स्थापना

माना जाता है कि राधाकुंड की स्थापना द्वापरयुग में अहोई अष्टमी के दिन ही हुई थी. भगवान श्रीकृष्ण ने इस कुंड में रात करीब 12 बजे स्नान किया था इसलिए आज भी यहां अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि में ही विशेष स्नान होता हैं हर साल देश विदेश से आए लाखों भक्त यहां कुंड के तट पर स्थित अहोई माता के मंदिर में पूजा करते हैं और आरती कर कुंड में दीपदान करते हैं.

10:30 AM. 17 Oct 2210:30 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी पर इस कुंड में करें स्नान

मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन यदि ऐसे दंपति राधा कुंड में स्नान करें, तो उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. राधा कुंड मथुरा नगरी से लगभग 26 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा के दौरान पड़ता है. हर साल अहोई अष्टमी के दिन यहां पर शाही स्नान का आयोजन किया जाता है. राधा कुंड मथुरा नगरी से करीब 26 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा के दौरान पड़ता हैं. मान्यता है कि इस रात्रि में अगर पति और पत्नी संतान प्राप्ति की कामना के साथ इस राधा कुंड में डुबकी लगाएं और अहोई अष्टमी का निर्जल व्रत रखें, तो उनके घर में जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं इसके अलावा जिन दंपति को यहां स्नान के बाद संतान प्राप्ति हो जाती हैं वे भी इस दिन अपनी संतान के साथ यहां राधा रानी की शरण में हाजरी लगाने आते हैं और इस कुंड में स्नान करते हैं माना जाता हैं कि राधा कुंड में अहोई अष्टमी के दिन स्नान की ये परंपरा द्वापरयुग से चली आ रही हैं.

10:30 AM. 17 Oct 2210:30 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी पर विशेष संयोग

अभिजीत मुहूर्त: 17 अक्तूबर, सोमवार, दोपहर 12:00 से 12: 47 मिनट तक

शिव योग प्रारंभ: 17 अक्तूबर, सोमवार प्रातःकाल से सायं 04: 02 मिनट तक

सर्वार्थ सिद्धि योग आरंभ: 17 अक्तूबर, सोमवार, प्रातः 05:11 मिनट से

सर्वार्थ सिद्धि योग समाप्त:18 अक्तूबर, सोमवार,प्रातः 06 :32 मिनट तक

मान्यता है इस योग में पूजा करने से दोगुना लाभ प्राप्त होता है.

7:40 AM. 17 Oct 227:40 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प करती हैं. पूजा के लिए गेरू पर दीवार से अहोई माता का चित्र बनाएं, साथ ही सेही और उनके सात पुत्रों का चित्र भी बनाती हैं. चित्र बनाने की जगह मार्केट से खरीदे गए कैलेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. सामग्री के लिए अहोई माता मूर्ति, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए जरूरी होते हैं.

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

इन बातों का रखें ख्याल

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता से पहले गणेश जी की पूजा करें

अहोई अष्टमी के दिन तारों को अर्घ्य देते हैं. तारों के निकलने के बाद ही अपने उपवास को तोड़ें.

अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा सुनते समय 7 तरह के अनाज अपने हाथ में रखें. पूजा के बाद इस अनाज को किसी गाय को खिला दें.

अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय बच्चों को अपने पास बिठाएं और अहोई माता को भोग लगाने के बाद वो प्रसाद अपने बच्चों को जरूर खिलाएं.

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

शुभ समय (Ahoi Ashtami Auspicious Time, Shubh Muhurat)

अष्टमी तिथि का आरंभ- हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 17 अक्टूबर 2022 को सुबह 09 बजकर 29 मिनट से हो जाएगा, जो 18 अक्टूबर 2022 को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक बना रहेगा

पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 05 बजकर 50 मिनट से लेकर 07 बजकर 05 मिनट तक बताया जा रहा है

तारों को देखने का समय- 17 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 13 मिनट तक

अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय- 17 अक्टूर की रात 11 बजकर 24 मिनट पर

2:13 PM. 17 Oct 222:13 PM. 17 Oct

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता से पहले गणेश जी की पूजा करें

अहोई अष्टमी के दिन तारों को अर्घ्य देते हैं. तारों के निकलने के बाद ही अपने उपवास को तोड़ें.

अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा सुनते समय 7 तरह के अनाज अपने हाथ में रखें. पूजा के बाद इस अनाज को किसी गाय को खिला दें.

अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय बच्चों को अपने पास बिठाएं और अहोई माता को भोग लगाने के बाद वो प्रसाद अपने बच्चों को जरूर खिलाएं.

6:08 AM. 17 Oct 226:08 AM. 17 Oct

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व

अहोई अष्टमी को अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है. इस व्रत को निर्जला रखा जाता है.  पूजा के बाद तारों को देखकर और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत को खोला जाता है. व्रत करने वाली माताएं अहोई माता से अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती हैं. अहोई अष्टमी व्रत करने से मन की हर मनोकामना पूरी हो जाती है. इस दिन अहोई देवी की तस्वीर के साथ सेई और सई के बच्चों के चित्र की पूजा करने का विधान है.

4:19 PM. 16 Oct 224:19 PM. 16 Oct

अहोई अष्टमी मंत्र

अहोई अष्टमी से 45 दिनों तक ‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः’ का 11 माला जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि संतान कामना की इच्छा रखने वाले लोगों की भी इच्छा पूरी हो जाती है.

2:32 PM. 16 Oct 222:32 PM. 16 Oct

शिव और सिद्ध योग में अहोई अष्टमी

अहोई अष्टमी के दिन शिव और सिद्ध योग बना हुआ है. शिव योग प्रात:काल से लेकर शाम 04 बजकर 02 मिनट तक है. उसके बाद से सिद्ध योग प्रारंभ हो जाएगा. सिद्ध योग में पूजा पाठ और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है. अहोई अष्टमी की तिथि में सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना हुआ है. यह 18 अक्टूबर को प्रात: 05 बजकर 13 मिनट से प्रात: 06 बजकर 23 मिनट तक है.

2:32 PM. 16 Oct 222:32 PM. 16 Oct

शाम 5:57 बजे से रात 7:12 बजे तक पूजा मुहूर्त

अहोई अष्टमी 17 अक्तूबर सोमवार की सुबह 9:29 बजे से शुरू होकर 18 अक्टूबर की सुबह 11:57 बजे तक रहेगा. पूजा का शुभ मुहूर्त 17 अक्तूबर को शाम 5:57 बजे से रात 7:12 बजे तक है. तारा देखने का समय शाम 6:20 बजे तक है. जबकि चंद्रोदय रात 11:35 बजे होगा.

2:32 PM. 16 Oct 222:32 PM. 16 Oct

अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प करती हैं. पूजा के लिए गेरू पर दीवार से अहोई माता का चित्र बनाएं, साथ ही सेही और उनके सात पुत्रों का चित्र भी बनाती हैं. चित्र बनाने की जगह मार्केट से खरीदे गए कैलेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. सामग्री के लिए अहोई माता मूर्ति, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए जरूरी होते हैं.

1:15 PM. 16 Oct 221:15 PM. 16 Oct

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री

अहोई माता मूर्ति या पोस्टर, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार के सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए आदि.

10:46 AM. 16 Oct 2210:46 AM. 16 Oct

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व (Ahoi Ashtami Importance)

यह व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखती हैं। इस व्रत को बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है. इस दिन भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की माता पार्वती की उपासना की जाती है. कहते हैं कि जो माताएं इस दिन व्रत रखती है, उनकी संतानों की दीर्घायु होती है, साथ ही उन्हें अपने जीवन में यश, कीर्ति, वैभव, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. बताया जाता है कि जिनकी माताएं इस दिन व्रत रखती हैं, उनके बच्चों की रक्षा स्वयं माता पार्वती करती हैं.

10:46 AM. 16 Oct 2210:46 AM. 16 Oct

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा

शास्त्रों में बताया गया है कि अहोई अष्टमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है और परिवार में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है. इस दिन माताएं अपनी सन्तान के कुशल भविष्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और तारा दिखने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

अहोई अष्टमी मंत्र

अहोई अष्टमी से 45 दिनों तक ‘ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः’ का 11 माला जाप करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि संतान कामना की इच्छा रखने वाले लोगों की भी इच्छा पूरी हो जाती है.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री

अहोई माता मूर्ति या पोस्टर, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार के सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए आदि.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व

ऐसी मान्यता है कि जिन महिलाओं की संतानें हमेशा बीमार रहती हैं उन्हें यह व्रत जरूर करने चाहिए. संतानें होते ही मर जाती हैं, उन्हें भी यह व्रत अवश्य करना चाहिए. संतानों की अच्छी और लंबी आयु के लिए महिलाओं को यह व्रत करना चाहिए. यह व्रत माता और पिता दोनों करें तो अधिक फल प्राप्त मिलता है.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

अहोई व्रत में ना पहनें इन रंगों के कपड़े

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं को नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए. जिन महिलाओं ने व्रत रखा हैं वे इन रंगों के कपड़े भूलकर भी धारण न करें.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

संध्या काल में पढ़ते हैं अहोई कथा

संध्या के समय अहोई माता की कथा सुनने के बाद तारे काे अर्घ्य देकर पूजा पूर्ण होती है. पूजा के बाद महिलाएं चांदी की बनी स्याहु की माला पहनती हैं.

8:53 AM. 16 Oct 228:53 AM. 16 Oct

अहोई माला पहनने का महत्व

अहोई अष्टमी के दिन स्याहु माला को संतान की लंबी आयु की कामना के साथ पहना जाता है. दिवाली तक इसे पहनना आवश्यक माना जाता है. मान्यता है कि इससे पुत्र की आयु लंबी होती है.

10:46 AM. 16 Oct 2210:46 AM. 16 Oct

अहोई अष्टमी पूजा विधि

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प करती हैं. पूजा के लिए गेरू पर दीवार से अहोई माता का चित्र बनाएं, साथ ही सेही और उनके सात पुत्रों का चित्र भी बनाती हैं. चित्र बनाने की जगह मार्केट से खरीदे गए कैलेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. सामग्री के लिए अहोई माता मूर्ति, माला, दीपक, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए जरूरी होते हैं.

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