Time Travel का सबूत? 1938 के वीडियो में महिला को मोबाइल फोन पर बात करते देख चौंक जाएंगे आप

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 21 Apr 2024 11:57 AM

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Time Travelers in 1938 film caught talking on a cell phone

Time Travel: 86 साल पुराने वीडियो को टाइम ट्रैवल का सबूत माननेवाले यह कह रहे हैं कि सेलफोन के आविष्कार से दशकों पहले इस महिला तक मोबाइल कैसे पहुंच गया.

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Time Travel : टाइम ट्रैवल लंबे समय से चर्चा में है. इस रोचक मुद्दे पर कई फिल्में और टीवी शो बन चुके हैं. यह हकीकत है या अफसाना, यह तो बाद की बात है, लेकिन समय-समय पर ऐसा कुछ हैरतअंगेज दिखाई पड़ जाता है जो इस बात को बल देता है कि टाइम ट्रैवल या समय यात्रा संभव है.

भविष्य में टाइम ट्रैवल के लिए क्या कोई टाइम मशीन बनायी जा सकती है? यह अवधारणा काफी लंबे समय से वैज्ञानिकों को रोमांचित करती आ रही है. अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षतावाद सिद्धांत में उन्होंने बताया था कि ब्रह्मांड में समय और अंतरिक्ष, चादर के रूप में एक-दूसरे से जुड़े हैं.

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टाइम ट्रैवल को कुछ लोग संभव मानते हैं, लेकिन इसका सबूत किसी के पास नहीं है. इन सभी बातों के बीच साल 1938 में बना एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद इस थ्योरी पर कुछ लोगों को यकीन हो रहा है कि टाइम ट्रैवल संभव है. इस वीडियो में एक महिला मोबाइल फोन पर बातचीत करती देखी जा सकती है.

साल 1938 में शूट किये गए इस वीडियो में एक महिला अपने कान के पास हाथ रखे नजर आ रही है. ऐसा लगता है जैसे वह फोन पर किसी से बात कर रही है. जबकि साल 1938 में सेलफोन का आविष्कार ही नहीं हुआ था. बता दें कि 3 अप्रैल 1973 को न्यूयॉर्क में मोटोरोला के मार्टिन कूपर ने पहला हैंडहेल्ड मोबाइल फोन प्रदर्शित किया था.

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इस वीडियो को कॉन्स्पिरेसी थ्योरिस्ट्स टाइम ट्रैवल का सबूत मान रहे हैं. उनका कहना है कि टाइम ट्रैवल वास्तव में संभव है. 86 साल पुराने वीडियो को आधार बनाकर यह बताया जा रहा है कि मोबाइल सेलफोन के आविष्कार से दशकों पहले इस महिला तक मोबाइल कैसे पहुंच गया. यह टाइम ट्रैवल का सबूत है.

85 साल पहले अमेरिका में एक फैक्ट्री के बाहर शूट किये गए इस वीडियो को टाइम ट्रैवल के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है. यूट्यूब पर शेयर किये गए वीडियो में फोन पर बात कर रही महिला ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है. हालांकि इस बात की पुष्टि करना असंभव है कि क्या वह सच में फोन पर बात कर रही है.

वीडियो को लेकर एक शख्स का दावा है कि फोन के साथ नजर आ रही महिला उनकी परदादी गर्ट्रूड जोन्स हैं. यह वीडियो तब का है जब वह 17 साल की थीं. शख्स काे उनकी परदादी ने बताया कि ड्यूपॉन्ट की फैक्ट्री में एक टेलीफोन कम्युनिकेशन सेक्शन था, जहां वायरलेस टेलीफोन के साथ प्रयोग किया जा रहा था. गर्ट्रूड और पांच अन्य महिलाओं को टेस्ट करने के लिए एक सप्ताह के लिए वायरलेस फोन दिये गए थे. वायरलेस फोन पकड़े हुए गर्ट्रूड वैज्ञानिकों में से एक से बात कर रही हैं.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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