दिमाग हिला देगा ये रंग! वैज्ञानिकों ने खोजा अनदेखा Olo Colour

Author :Rajeev Kumar
Published by :Rajeev Kumar
Updated at :20 Apr 2025 12:48 PM
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What Is Olo Colour?

What Is Olo Colour?

क्या आपने कभी ऐसा रंग देखा है जिसे इंसान की आंखें नहीं देख सकतीं? वैज्ञानिकों ने खोजा 'Olo Colour' – एक नया रंग जो हमारी दृश्य सीमा से परे है. जानिए इस खोज के पीछे की पूरी कहानी.

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Olo Colour | Scientists Find New Color Olo: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसा रंग खोजा है जिसे पहले कभी किसी ने नहीं देखा था. इस नए रंग का नाम है ‘Olo’, जो एक बेहद चमकीला और गहराई से भरा नीला-हरा (blue-green) रंग है. यह हमारी आंखों की सामान्य रंग देखने की क्षमता से परे है.

कैसे खोजा गया ‘Olo’?

वैज्ञानिकों ने एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे “Oz टेक्नीक” कहा गया. इसमें लेजर की मदद से आंख की रेटिना के खास हिस्से को सीधे उत्तेजित किया गया. इस तकनीक से M-cones (जो हरे रंग के प्रति संवेदनशील होते हैं) को अलग से सक्रिय किया गया. इससे बिना किसी अन्य रंग के हस्तक्षेप के, आंख एक नया अनुभव कर पाई – Olo रंग का.

Olo रंग कैसा दिखता है?

रिसर्च में शामिल 5 प्रतिभागियों के अनुसार:

यह रंग बेहद चमकीला था.

सामान्य हरे रंग जैसे लेजर पॉइंटर इसके सामने फीके लगे.

यह एक अनदेखा नीला-हरा रंग है, पर उससे कहीं ज्यादा गहरा और इंटेंस.

क्यों रखा गया नाम ‘Olo’?

इसका नाम ‘Olo’ इसलिए रखा गया क्योंकि इसका कोई सीधा मिलान किसी ज्ञात रंग से नहीं हो सकता. यह एक बिल्कुल नया दृश्य अनुभव है. वहीं, प्रयोग में इस्तेमाल तकनीक को “Oz” कहा गया – जैसा कि मशहूर फिल्म WizardofOz में हरे चश्मे के जरिए एक नई दुनिया दिखाई देती है.

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अभी पूरी आंख से नहीं, किनारे से दिखता है Olo

फिलहाल, यह रंग सिर्फ आंखों के किनारों (Peripheral Vision) से देखा जा सकता है. आंखों के मध्य भाग (Fovea) को इतनी सटीकता से टारगेट करने वाली तकनीक अभी निर्माणाधीन है.

वैज्ञानिक खोज से बढ़ सकती हैं मेडिकल संभावनाएं

‘Olo’ रंग की खोज सिर्फ रंग देखने तक सीमित नहीं है. इससे जुड़ी तकनीक आगे चलकर कई बीमारियों के इलाज में मददगार हो सकती है:

कलर ब्लाइंडनेस (रंगांधता) के इलाज में नई उम्मीद.

रेटिनाइटिसपिगमेंटोसा जैसी रेटिना संबंधी बीमारियों को समझने में सहायक.

दिमाग और आंखों के बीच रंगों की व्याख्या के संबंधों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा.

क्या हम सभी देख पाएंगे ‘Olo’?

भविष्य में, जब यह तकनीक सभी के लिए उपलब्ध होगी, तो शायद हम सभी इंसान इस अद्भुत रंग को देख पाएंगे. फिलहाल यह सिर्फ विज्ञान की एक झलक है – पर एक रोमांचक झलक जो हमें हमारी आंखों की सीमाओं से परे ले जाती है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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