X और WhatsApp हुए फेल, Instagram एल्गोरिदम ने कर दिया खेल, हर यूजर को दिखाया CJP स्टूडेंट प्रोटेस्ट का अलग सच

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स्टूडेंट प्रोटेस्ट में इंस्टाग्राम का बड़ा खेल / सांकेतिक तस्वीर एआई से बनी

क्या इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम सच दिखाने के बजाय सिर्फ व्यूज कमाने का जरिया बन चुका है? जानिए CJP छात्र आंदोलन में रील्स, एआई बॉट्स और डिस्कवरी इंजन के जरिए कैसे खेला गया बड़ा दांव.

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित छात्र आंदोलन ने भारतीय राजनीति और डिजिटल स्पेस के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है. व्हाट्सएप और X (ट्विटर) जैसे पारंपरिक माध्यमों के बजाय इस बार पूरे विरोध प्रदर्शन का खाका इंस्टाग्राम के रील्स और ऑडियो-विजुअल एल्गोरिदम के जरिए तैयार किया गया. देखते ही देखते एक स्थानीय स्तर की घटना इंस्टाग्राम के डिस्कवरी इंजन के दम पर एक विशाल देशव्यापी आंदोलन में बदल गई. हालांकि, इस पूरे वाकये में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम किसी निष्पक्ष खबर या जमीनी सच्चाई के बजाय सिर्फ यूजर के स्क्रीन टाइम और एंगेजमेंट को बढ़ाने वाले कंटेंट को तरजीह दे रहा था.

डिस्कवरी इंजन का असर: 82% नॉन-फॉलोअर्स तक पहुंचा कंटेंट

इस पूरे घटनाक्रम में इंस्टाग्राम के सिफारिशी एल्गोरिदम (Recommendation Algorithm) की भूमिका सबसे अहम रही. CJP के मुख्य अकाउंट के डेटा से पता चलता है कि कुल इंगेजमेंट का 82.38 प्रतिशत हिस्सा उन लोगों से आया था जो उस पेज को फॉलो ही नहीं करते थे. इंस्टाग्राम ने सिर्फ फॉलोअर्स के नेटवर्क तक सीमित रहने के बजाय वॉच-टाइम और स्क्रीन टेक्स्ट के आधार पर इस पॉलिटिकल कंटेंट को नए-नए यूजर्स तक धकेला. इसका असर यह हुआ कि जो युवा राजनीति से दूर रहते थे, उनके फीड में भी मनोरंजन और लाइफस्टाइल रील्स के बीच प्रदर्शन से जुड़े वीडियो अपने आप तैरने लगे.

रील्स, मीम्स और ट्रेंडिंग साउंड से बदली मीडिया की दिशा

पहले किसी भी जमीनी आंदोलन की खबरें मुख्यधारा के मीडिया से होते हुए सोशल प्लैटफॉर्म्स पर पहुंचती थीं, लेकिन CJP प्रदर्शन में यह पैटर्न पूरी तरह उलट गया. जंतर-मंतर पर घटित हुई छोटी से छोटी घटना का फोन वीडियो सीधे रील बना, फिर उस पर मीम्स बने और बाद में वह एक ट्रेंडिंग ऑडियो ट्रैक में बदल गया. छात्रों ने व्यंग्यात्मक अंदाज में 'गेट रेडी विद मी' जैसे रील्स तैयार किए, जिनमें पुलिस लाठीचार्ज से बचाव के तरीके दिखाए गए. इस मनोरंजक और हटकर बने कंटेंट को एल्गोरिदम ने अधिक रिटेंशन टाइम दिया और इसे करोड़ों फीड्स तक फैला दिया.

हर यूजर को दिखा अलग सच: फैक्ट्स नहीं, व्यूज का खेल

इस पूरे आंदोलन के दौरान प्लैटफॉर्म ने हर यूजर के व्यवहार के हिसाब से उसे एक अलग ही दुनिया दिखाई. इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और हैशटैग्स के जरिए यह समझता है कि यूजर क्या देखना पसंद कर रहा है. यदि किसी ने विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो पूरा देखा, तो सिस्टम ने लगातार उसे उग्र और उत्तेजक सामग्री परोसना शुरू कर दिया. विशेषज्ञों का मानना है कि मेटा की इस प्रणाली को फैक्ट्स या जमीनी सच से कोई सरोकार नहीं होता, उसका एकमात्र उद्देश्य यूजर्स को जोड़े रखकर विज्ञापन से मुनाफा कमाना होता है.

सरकारी कार्रवाई और एल्गोरिदम में हेरफेर की जांच

जैसे-जैसे इंस्टाग्राम पर इस आंदोलन का असर गहराया, प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था हरकत में आई. आईटी नियमों के तहत कई लोकप्रिय प्रोफाइल पर शैडो-बैन, वीडियो हटाने और अकाउंट पर पाबंदी जैसे कड़े कदम उठाए गए. इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान यह संदेह भी जताया कि इस आंदोलन को अप्रत्याशित रफ्तार देने के लिए एआई-असिस्टेड पोस्ट्स और विदेशी बॉट नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ था, जिससे प्लेटफॉर्म का सिस्टम ट्रिगर होकर कंटेंट को जबरन वायरल करने लगा.


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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

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डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. Google Discover और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारी भरे होते हैं, बल्कि यूजर्स की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, कॉम्पैरिजन-बेस्ड आर्टिकल्स और एक्सप्लेनर स्टोरीज को यूजर्स काफी पसंद करते हैं.

राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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