YouTube का यह टूल पकड़ेगा डीपफेक वीडियो, अब पत्रकार और राजनेता भी कर सकेंगे इस्तेमाल

Published by : Shivani Shah Updated At : 12 Mar 2026 12:03 PM

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यूट्यूब

YouTube ने AI-जेनरेटेड डीपफेक से निपटने के लिए अपने Likeness Detection टूल का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. अब यह टूल पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर बनाए गए फर्जी वीडियो को जल्दी पहचाना और हटाया जा सके.

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इंटरनेट पर डीपफेक वीडियो का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरे की नकल बनाकर गलत जानकारी फैलाना आज पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. इसी खतरे को देखते हुए वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube ने अपने खास Likeness Detection Tool को अब और ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने का फैसला किया है.

क्या है Likeness Detection Tool?

YouTube ने इस फीचर को पहली बार अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया था. इसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो को पहचानना है, जिनमें किसी व्यक्ति के परमिशन के बिना उसकी आवाज या चेहरा AI की मदद से कॉपी किया गया हो.

अब किन लोगों को मिलेगा फायदा?

YouTube ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया, कि अब इस टूल को पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और पॉलिटिकल लीडर्स के लिए भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि उनके नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले डीपफेक वीडियो को आसानी से हटाया जा सके. इन लोगों का समाज में काफी प्रभाव होता है, इसलिए अगर इनके नाम या चेहरे का इस्तेमाल करके किसी तरह का फर्जी वीडियो बनाया जाता है, तो उससे गलत जानकारी और सामाजिक अशांति फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसी वजह से कंपनी ने इन यूजर्स को भी इस टूल से जोड़ने का फैसला किया है.

फिलहाल यह फीचर पायलट प्रोग्राम के तहत लिमिटेड यूजर्स को ही उपलब्ध कराया जा रहा है. आने वाले महीनों में इसे और ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है.

कैसे काम करता है यह टूल?

इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए एलीजिबल लोगों को पहले एनरोलमेंट प्रोसेस पूरा करना होगा. इसके तहत यूजर्स को अपनी पहचान सत्यापित (Identity Verification) करनी होगी. वेरिफिकेशन के लिए उन्हें अपना फोटो आईडी जमा करना होगा और अपने चेहरे का एक वीडियो रिकॉर्ड करके भेजना होगा. इन जानकारी का इस्तेमाल व्यक्ति की असली पहचान और उसके चेहरे व आवाज की पहचान के लिए किया जाता है.

इसके बाद YouTube की टीम उनके आवेदन की जांच करेगी. सब कुछ सही होने पर कंपनी यूजर को ईमेल के जरिए कन्फर्मेशन भेजेगी की उनका सेटअप पूरा हो गया है. इसके बाद वे अपने नाम या चेहरे का गलत इस्तेमाल करने वाले डीपफेक वीडियो को हटाने का अनुरोध कर सकते हैं.

डेटा सुरक्षा को लेकर क्या कहा गया?

YouTube का कहना है कि वेरिफिकेशन के दौरान जमा किया गया डेटा, सिर्फ आइडेंटिटी वेरीफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसे Google के AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.

कंपनी के मुताबिक, यह डेटा YouTube के इंटरनल डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाएगा और यूजर के आखिरी साइन-इन के बाद तीन साल तक स्टोर किया जा सकता है. इसके बाद इसे कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार संभाला जाएगा.

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शिवानी कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर टेक-ऑटो कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में वह 3 सालों से सक्रिय हैं. वह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं. वह आसान भाषा और साफ तरीके से खबर लिखती हैं. टेक कैटेगरी में वह स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स पर खबर लिखती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी शिवानी नई कार-बाइक लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटो अपडेट्स, कार और बाइक से जुड़े टिप्स व नई तकनीक पर खबरें लिखती हैं. वह टेक और ऑटो की खबरों को आसान तरीके से पेश करती हैं, ताकि हर रीडर उसे आसानी से समझ सके. उनकी लेखन शैली आसान, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है. शिवानी ने करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे कंटेन्ट राइटिंग की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिवानी ने Lagatar.Com और The News Post जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है. यहां उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य न्यूज बीट पर कंटेंट तैयार किया. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में उनकी खास रुचि है और वह लगातार नए विषयों पर बेहतर और भरोसेमंद कंटेंट तैयार कर रही हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शिवानी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि रीडर्स तक सही, काम की खबरें और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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