दुर्गापुर बैराज से छोड़ा गया एक लाख क्यूसेक पानी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Aug 2024 9:10 PM

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पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी का स्तर काफी बढ़ गया है. जिससे विभिन्न जिलों में बाढ़ का खतरा हो गया है. शनिवार सुबह दुर्गापुर बेराज से करीब सत्तर हजार क्यूसेक जल छोड़ने के बाद, पानी छोड़ने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा. रविवार सुबह बैराज से करीब 95 हजार से एक लाख क्यूसेक जल छोड़ने से स्थिति के और गंभीर होने की आशंका है.

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दुर्गापुर. पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी का स्तर काफी बढ़ गया है. जिससे विभिन्न जिलों में बाढ़ का खतरा हो गया है. शनिवार सुबह दुर्गापुर बेराज से करीब सत्तर हजार क्यूसेक जल छोड़ने के बाद, पानी छोड़ने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा. रविवार सुबह बैराज से करीब 95 हजार से एक लाख क्यूसेक जल छोड़ने से स्थिति के और गंभीर होने की आशंका है. जिसका प्रभाव राज्य के विभिन्न जिलों पर पड़ सकता है. बैराज से जल छोड़ने के कारण पश्चिम बर्दवान, बांकुड़ा, पूर्व बर्दवान, हुगली, हावड़ा जिले के निचले हिस्सों में पानी प्रवेश करने लगा है. जिससे धान की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गयी है. बैराज से जल छोड़ने का कारण पास निकटवर्ती राज्य झारखंड के पांचेत, मैथन डैम से पानी का छोड़ा जाना बताया गया है. अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह दुर्गापुर बैराज के कैनल के जरिये खेती के लिए जल छोड़ा गया था. उसके बाद लगातार बारिश के कारण खेतों में पहले से ही जल उपलब्ध है. इस परिस्थिति में बैराज से इतने अधिक परिमाण में जल छोड़ने से फसल का नुकसान होने के साथ साथ कई मैदानी व निचले इलाकों में जल भरने का खतरा प्रबल है. आने वाले दिनों में बैराज का लोड बढ़ने पर और जल छोड़ा जा सकता है.

मंत्री ने डीवीसी को ठहराया जिम्मेदार

बैराज से पानी छोड़ने को लेकर होने वाले नुकसान के लिए राज्य के पंचायत, ग्राम उन्नयन मंत्री प्रदीप मजूमदार ने डीवीसी को जिम्मेदार ठहराया है. श्री मजूमदार ने बताया कि सरकार इस मामले को लेकर काफी सजग है. डीवीसी के कारण ही ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. डीवीसी को पानी न छोड़ने का निर्देश मिलने के बाद भी निर्देश की अवहेलना कर दुर्गापुर बैराज का पानी छोड़ा गया. जिससे यह गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है. मंत्री ने कहा कि बीते महीने राज्य में कम बारिश होने के कारण राज्य सरकार के सिंचाई विभाग व डीवीसी के बीच 28 जुलाई से पांच अगस्त तक पानी छोड़ने संबंधी समझौता हुआ था.

समझौते के मुताबिक 28 जुलाई से दुर्गापुर कैनल के जरिए छह हजार क्यूसेक जल विभिन्न जिलों में भेजना शुरू हुआ था. लेकिन एक अगस्त को तेज बारिश हो जाने और डीवीसी द्वारा छोड़े गये पानी से विभिन्न जिलों के कई इलाके जलमग्न हो गये थे. फसलों को नुकसान होता देख राज्य सिंचाई विभाग ने डीवीसी को पानी न छोड़ने का निर्देश दिया था. जिसपर डीवीसी ने भी सहमति जतायी थी. पानी न छोड़ने का सिंचाई विभाग और डीवीसी को दिया गया निर्देश सबूत के तौर पर मौजूद है. उसके बावजूद भी डीवीसी ने निर्देश पत्र की अवहेलना कर शुक्रवार और शनिवार रात भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया. जिससे दुर्गापुर बैराज का लोड बढ़ गया है.

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में अधिक बारिश होने पर मैथन और पंचेत डैम के जरिए हर वर्ष बंगाल में पानी भेज दिया जाता है. जिससे हर वर्ष बंगाल के कई जिलों को नुकसान उठाना पड़ता है. डीवीसी के पानी छोड़ने से राज्य के विभिन्न जिलों में फसलों को नुकसान हुआ और कई शहर जलमग्न हो गये हैं. उन्होंने कहा कि डीवीसी के कारण कितनी फसल को नुकसान हुआ है उसका आंकड़ा अभी नहीं मिल सका है. खेतों से पानी हटने के बाद धान की खेती कितनी प्रभावित हुई है इसका आंकलन किया जायेगा.

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