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सोनू को गोली नहीं लगती तो कहानी कुछ और होती: मेघनाद मंडल

Updated at : 13 Jun 2024 12:57 AM (IST)
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सोनू को गोली नहीं लगती तो कहानी कुछ और होती: मेघनाद मंडल

रानीगंज डकैती कांड को अकेले के बल पर नाकाम करनेवाले पुलिस अधिकारी मेघनाद मंडल ने पहली बार प्रभात खबर को बतायी उस दिन की पूरी दास्तां

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आसनसोल/रानीगंज. रानीगंज थाना क्षेत्र के एनएसबी रोड पर स्थित सेनको गोल्ड एंड डायमंड के शोरूम में रविवार दोपहर को डकैती के दौरान सात बदमाशों से अकेले लोहा लेने वाले व डकैतों के मंसूबों पर पानी फेरनेवाले जामुड़िया थाना अंतर्गत श्रीपुर फांड़ी के प्रभारी अवर निरीक्षक मेघनाद मंडल ने पहली बार प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि सोनू सिंह उर्फ सोनू गुप्ता उर्फ विश्वजीत गुप्ता को गोली नहीं लगती तो कहानी कुछ और होती. सोनू अपने हाथ में कारबाइन थामे हुए था, उसे गोली लगते ही वह गिर गया और कारबाइन उसके हाथ से छिटककर दूर चली गयी. गैंग में शामिल दूसरा कोई कारबाइन उपयोग करना नहीं जानता था. यदि कारबाइन से फायरिंग शुरू कर देते तो फिर बचना मुश्किल हो जाता.

डकैती की सूचना मिलते ही सबसे पहले उसे रोकने की बात दिमाग में आयी और बिना कुछ सोचे समझे दूसरे थाना क्षेत्र में आकर वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बगैर ही फायरिंग शुरू कर दी. इसके लिए पुलिस आयुक्त सुनील कुमार चौधरी का प्रोत्साहन काफी काम आया. वह अपराध से निबटने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहते हैं. किसी प्रकार की कोई बंदिश नहीं लगाते हैं. फायरिंग के बाद उन्हें यह डर लग रहा था कि बिना अनुमति के दूसरे थाना क्षेत्र में फायरिंग के लिए कोई विभागीय कार्रवाई तो नहीं होगी. लेकिन पुलिस आयुक्त से लेकर पुलिस उपायुक्त व अन्य सभी अधिकारियों ने इसकी सराहना की.

गौरतलब है कि बीते रविवार दोपहर 12:23 बजे सात डकैतों का एक दल रानीगंज के सेनको गोल्ड शोरूम में डाका डालने घुसा. ठीक उसी समय पुलिस अधिकारी श्री मंडल शोरूम के समक्ष एक दुकान में निजी कुछ काम से आये थे. वह पहले रानीगंज थाना इलाके में रह चुके हैं, तो इलाके के लोग भी उन्हें पहचानते हैं और पुलिस की गाड़ी भी उनके साथ थी. किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि शोरूम में डकैती हो रही है. श्री मंडल के साथ कोई कांस्टेबल भी नहीं था, अकेले उन्होंने शोरूम के पास जाकर बदमाशों पर फायरिंग शुरू कर दी. एक बदमाश को गोली भी लग गयी. जिससे डकैतों के मंसूबे पर पानी फिर गया और डकैती की पूरी प्लानिंग फेल हो गयी. करीब चार करोड़ रुपये मूल्य के सोने व हीरों के जेवरात को बैग में भरा था, एक बैग में 1.83 करोड़ रुपये मूल्य का ही सामान ले जा पाये, बाकी यहीं छूट गया. एक बदमाश को गोली लगने से उनका सारा प्लान बिगड़ गया. घायल साथी को लेकर भागने के क्रम में आसनसोल में डकैतों ने एक कार लूटी व कार मालिक को गोली मारी. गिरिडीह में दो आरोपी पकड़े गये. इस घटना के बाद पुलिस अधिकारी श्री मंडल हीरो बनकर उभरे और हर तरफ उनके इस साहसिक कार्य की सराहना हो रही है. वेस्ट बंगाल पुलिस के फेसबुक में इनके कार्य की विस्तृत रिपोर्टिंग की गयी है और सैकड़ों की संख्या में लोग वाहवाही के साथ उनकी हिम्मत की दाद दे रहे हैं. चारों तरफ से मिल रही शाबासी लेकिन परिजनों की बढ़ गयी है चिंता

श्री मंडल 2015 बैच के अवर निरीक्षक हैं. अवर निरीक्षके बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग दुर्गापुर ए जोन फांड़ी में अवर निरीक्षक के रूप में हुई. उसके बाद रानीगंज थाना में अवर निरीक्षक के पद रहे रहे. वर्ष 2022 में उन्हें एनटीएस थाना क्षेत्र के विधाननगर पुलिस फांड़ी के प्रभारी का दायित्व मिला. उसके बाद श्रीपुर फांड़ी के प्रभारी के पद पर वह आये हैं. मुर्शिदाबाद जिले के कांदी महकमा क्षेत्र में उनका आवास है. घर में उनकी पत्नी, कक्षा चार में पढ़ने वाली एकमात्र बेटी, माता, पिता व छोटा भाई है. दो बड़ी बहनों की शादी हो गयी है. श्री मंडल ने बताया कि इस घटना के बाद जगह हर तरफ शाबासी मिल रही है वहीं घरवाले काफी डरे हुए हैं. भगवान उस दिन उनके सामने एक बिजली पोल के रूप में ढाल बनकर खड़े थे, जिसके कारण दर्जनों गोलियां आस-पास से निकली, एक गोली भी उन्हें छू नहीं पायी और उनकी एक गोली से सरगना सोनू ही घायल हो गया.

गोली खत्म होते ही थोड़ा डर लगा, लेकिन डकैत भागने में ज्यादा व्यस्त रहे

सेनको गोल्ड डकैती कांड को अपने जीवन का सबसे कठिन अनुभव बताते हुए श्री मंडल ने कहा कि उनके पास नाइन एमएम की सर्विस रिवाल्वर थी, जिसमें 10 राउंड गोली थी. 10 गोलियां डेढ़ मिनट में ही खत्म हो गयीं. 10 इंच के एक बिजली के पोल को ढाल बनाकर वह फायरिंग कर रहे थे. दूसरी ओर से छह बदमाश बारी-बारी से लगातार फायरिंग कर रहे थे. दूसरी गोली में सोनू के घायल होकर गिर पड़ने से उनका मनोबल काफी टूट गया. डकैत किसी तरह यहां से बचकर भागने के लिए फायरिंग किये जा रहे थे. गोली खत्म हो जाने से थोड़ा डर लगने लगा कि वे नजदीक से आकर फायरिंग करने लगे तो क्या होगा? लेकिन उनकी ओर से फायरिंग रुकते ही डकैतों ने भागने में सारा ध्यान केंद्रित कर दिया, जिससे राहत मिली.

नहीं समझ पाया कि उनकी संख्या कितनी है और इतने घातक हथियार से वे होंगे लैस

श्री मंडल ने बताया कि जैसे ही डकैती की सूचना उन्हें स्थानीय एक व्यक्ति ने दी, उन्होंने बगैर हिचके डकैतों को रोकने के लिए फायरिंग कर दी और एक बदमाश घायल हो गया. डकैतों के पास कारबाइन और इतनी भारी मात्रा में पिस्तौल और गोलियां होंगी वह यह नहीं समझ पाये. जिस बिजली पोल को ढाल बनाया था वहां एक बाइक खड़ी थी, उस बाइक की टंकी में सात गोलियां लगीं. ऐसे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि सामने से कैसी फायरिंग हो रही थी. सब कुछ खत्म होने के बाद उन्हें समझ में आया कि रिस्क बहुत ज्यादा हो गया था. लेकिन संतुष्टि इस बात की रही कि पुलिस का फर्ज निभाने में कोई कोताही नहीं बरती. इस दौरान यदि वह यह नहीं करते तो जिंदगी भर खुद को कभी माफ नहीं कर पाते.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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