धर्म की आड़ में हो रहा है व्यापार : शंकराचार्य
सिलीगुड़ी. धर्म के नाम पर कुछ तथाकथित साधू-संत व्यापार करने में लगे हुए है और भोलीभाली जनता उनके छलावे में आ कर उन्हें धर्म गुरु की संज्ञा दे देते हैं. पिछले कुछ दिनों के दौरान इसी प्रकार के तथाकथित धर्मगुरुओं की बाढ़ आ गयी है, जिसकी वजह से सच्चे धर्म गुरुओं को भी बदनाम होना […]
सिलीगुड़ी. धर्म के नाम पर कुछ तथाकथित साधू-संत व्यापार करने में लगे हुए है और भोलीभाली जनता उनके छलावे में आ कर उन्हें धर्म गुरु की संज्ञा दे देते हैं. पिछले कुछ दिनों के दौरान इसी प्रकार के तथाकथित धर्मगुरुओं की बाढ़ आ गयी है, जिसकी वजह से सच्चे धर्म गुरुओं को भी बदनाम होना पड़ता है.
ये बातें गोवर्धन मठाधीस पुरी के श्री श्री जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहीं. वह यहां बाबुपाड़ा में श्री राजेश अग्रवाल के आवास पर आयोजित एक सत्संग को संबोधित कर रहे थे. इस सत्संग का आयोजन दिव्य सत्संग समिति ने किया है. शंकराचार्य ने आगे कहा कि कई संत आजकल राजनीति भी करने लगे है, जो सही नहीं है. संतों को किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं करनी चाहिए. आजकल नेता संतों का इस्तेमाल करते हैं और काम निकलते ही संतों को दरकिनार कर देते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस आधुनिक युग में श्क्षिा का स्तर गिरा है, जिसकी वजह से धर्म के प्रति भी लोगों का भरोसा कम हुआ है.
पहले के जमाने में सनातन धर्म के माध्यम से शिक्षा दी जाती थी. बच्चों के धर्म के प्रति संवेदनशील बनाया जाता था, लेकिन आज के जमाने में शिक्षा में आधुनिकता का समावेश हो गया है. उन्होंने कुछ संतों को जादुगर भी बताया और कहा कि ऐसे संत व्यवसायियों से झोला भर भर कर रुपये ले जाते हैं, इसमें व्यवसायियों की भी अपनी हित छिपी होती है.
व्यवसायी ऐसे तथाकथित धर्मगुरु को पैसे देकर अपना धंधा चमकाना चाहते हैं. इसी वजह से वह ऐसे धर्मगुरुओं के पीछे भारी भरकम रुपये खर्च करते हैं. उन्होंने कहा कि देश में सरकार के नियंत्रण में जितने भी मंदिरों का संचालन हो रहा है, वहां से प्राप्त आमदनी को विकास कार्य में अथवा सामाजिक कार्य में खर्च नहीं किया जाता. इन पैसों को कर्मचारियों की तनख्वाह एवं राजनीतिक दलों के नेताओं के आवभगत में खर्च किया जाता है. इस अवसर पर भारी संख्या में भक्त मौजूद थे.
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