कालियागंज : झाड़ू बनाकर स्वावलंबी बन रहीं पलिहार की महिलाएं

Updated at : 14 Jul 2018 4:25 AM (IST)
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कालियागंज : झाड़ू बनाकर स्वावलंबी बन रहीं पलिहार की महिलाएं

नारियल के पत्तों से बनातीं हैं झाड़ू समेत अन्य सामान लड़कियां भी इस कुटीर उद्योग से कर रहीं अतिरिक्त आय कालियागंज : राज्य में बेरोजगारी की समस्या जिस तरह से ग्रामीण इलाकों में देखी जाती है, उसमें कुटीर उद्यम इसका एक बेहतर हल होता है. अभी भी उत्तर बंगाल के कई ग्रामीण इलाकों में कुटीर […]

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नारियल के पत्तों से बनातीं हैं झाड़ू समेत अन्य सामान

लड़कियां भी इस कुटीर उद्योग से कर रहीं अतिरिक्त आय

कालियागंज : राज्य में बेरोजगारी की समस्या जिस तरह से ग्रामीण इलाकों में देखी जाती है, उसमें कुटीर उद्यम इसका एक बेहतर हल होता है. अभी भी उत्तर बंगाल के कई ग्रामीण इलाकों में कुटीर उद्योग तमाम असुविधाओं के बीच चल रहा हैं.

ये कुटीर उद्यम ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ा सहारा है. इसी तरह की तस्वीर हम कालियागंज ब्लॉक अंतर्गत मालगांव ग्राम पंचायत के साहेबघाटा के निकटवर्ती पलिहार गांव में देखा जाता है. यहां की महिलाएं नारियल के पत्तों से झाड़ू बनाने का काम करती हैं.

इस तरह से इन महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी होने में मदद मिलती है. गरीबी से जूझ रहे इस गांव के लिए नारियल का झाड़ू बनाना काफी मददगार साबित हो रहा है. यहां की लड़कियों को छोटी उम्र से ही झाड़ू बनाने का काम सिखाया जाता है. कई पीढ़ियों से ये महिलाएं समय के साथ नये-नये डिजाइनों वाले झाड़ू बनाती हैं. जिनकी बाजारों में काफी मांग है.

पलिहार गांव कालियागंज शहर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वहां देखा गया कि अधिकतर घरों में नारियल के पत्तों की डंठल से महिलाएं झाड़ू बनाती हैं.

गांव की एक बुजुर्ग महिला तस्लीमा कर्मकार ने बताया कि काफी दिनों से वे लोग झाड़ू बनाने का कार्य कर रही हैं. यह उनकी जीविका का एक जरूरी साधन बन गया है. गरीबों के लिए यह एक बड़ा संबल है. गांव के वयस्क पुरुष और महिलाओं के साथ ही स्कूल जाने वाली लड़कियां भी झाड़ू बनाने का काम करती हैं.

इस तरह से उन्हें हाथ खर्च के पैसे भी मिल जाते हैं. साहेबघाटा के युवा तृणमूल कांग्रेस के नेता राज मोहम्मद ने बताया कि पलिहार गांव की प्रत्येक लड़कियां आर्थिक रूप से स्वनिर्भर हैं. यहां के बने झाड़ू कालियागंज के अलावा उत्तर दिनाजपुर जिले के बाहर बड़े स्तर पर बिकते हैं. इसके चलते हमें गर्व अनुभव होता है. लेकिन इस कुटीर उद्यम को बचाने के लिए बैंकों से ऋ ण दिलाने की व्यवस्था होनी चाहिए.

अक्सर ये लोग स्थानीय महाजनों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेते हैं. इससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और लाभ का एक अच्छा-खासा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है.

इस गांव की आठवीं कक्षा की छात्रा शांतनी कर्मकार ने बताया कि एक तरफ जहां सरकार बेरोजगारी दूर करने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है, वहीं झाड़ू बनाने के कुटीर उद्यम को राज्य सरकार की तरफ से हर तरह का प्रोत्साहन मिलना चाहिए.

अगर हमें बैंकों से ऋ ण दिलाने की व्यवस्था होती है तो इस उद्यम का काफी विकास हो सकता है और इसके माध्यम से गांव की अर्थनीति बदल सकती है. पलिहार गांव के चरण कर्मकार ने बताया कि राज्य सरकार को इस कुटीर उद्यम को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना चाहिए.

मालगांव ग्राम पंचायत के प्रधान अबू ताहेर ने कहा कि पलिहार गांव में झाड़ू बनाने के उद्यम के विकास के लिए उन्होंने जिलाधिकारी से बात की है. जिले में कुटीर उद्यम का विकास करते हुए झाड़ू बनाने वालों को किस तरह से मदद दी जाये, इस पर विचार किया जा रहा है.

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