लकड़ी तस्करों का स्वर्ग बना सिलीगुड़ी

Published at :04 Oct 2017 9:41 AM (IST)
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लकड़ी तस्करों का स्वर्ग बना सिलीगुड़ी

सिलीगुड़ी: वन्य जीवों की तस्करी के बाद सिलीगुड़ी शहर अब लकड़ी तस्करों का भी स्वर्ग बन रहा है. उत्तर बंगाल के विभिन्न जंगलों से अवैध रूप से लकड़ियां काटी जा रही है और उसकी तस्करी के लिए सिलीगुड़ी का इस्तेमाल एक हब के रूप में हो रहा है. यही कारण है कि सिलीगुड़ी तथा इसके […]

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सिलीगुड़ी: वन्य जीवों की तस्करी के बाद सिलीगुड़ी शहर अब लकड़ी तस्करों का भी स्वर्ग बन रहा है. उत्तर बंगाल के विभिन्न जंगलों से अवैध रूप से लकड़ियां काटी जा रही है और उसकी तस्करी के लिए सिलीगुड़ी का इस्तेमाल एक हब के रूप में हो रहा है.
यही कारण है कि सिलीगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाकों में पिछले दो महीने के दौरान वन विभाग द्वारा की गयी छापामारी में बड़े पैमाने पर अवैध लकड़ियां बरामद की गयी है. मंगलवार को भी वन विभाग को एक बड़ी सफलता मिली है.प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग बैकुंठपुर डिवीजन के बेलाकोबा रेंज द्वारा करीब 10 लाख रूपये मूल्य की लकड़ियां जबत की गयी.

वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वेलकोबा रेंज के रेंजर संजय दत्त के नेतृत्व में वन विभाग की एक टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर अभियान चलाया.सिलीगुड़ी के निकट बागडोगरा इलाके में एक ट्रक डब्ल्यूबी 15-9489 को रोका गया. लेकिन चालक वैन को नहीं रोका. वन विभाग की टीम ने उसक पीछा करना शुरू कर दिया. फांसीदेवा के निकट ट्रक को रोककर चालक तत्काल फरार हो गया. वन विभाग के लोगों ने उसको पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह पकड़ में नहीं आया.ट्रक की जब तालाशी ली गयी तो उसमें लकड़ियां भरी मिली. काठ के कई लॉग उसमें लदे हुए थे. इसबीच,वन विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो महीने के दौरान बड़े पैमाने पर लकड़ी तस्करों के खिलाफ अभियान की शुरूआत की गयी है. यही वजह है कि दो महीने के दौरान जहां 36 लकड़ी तस्करों की गिरफ्तारी हुयी है वहीं तस्करी में लिप्त 26 गाड़ियों को जब्त किया गया है.इस दौरान डेढ़ करोड़ रूपये से अधिक की अवैध लकड़ियां भी जब्त की गयी है.

लकड़ी तस्करी के बढ़ते मामले में वन विभाग की चिंता का आलम इसी बातम से लगाया जा सकता है कि उत्तर बंगाल में तस्करों पर नकेल लगाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है. इस मामले जब उत्तर बंगाल के मुख्य वनपाल एमआर बालोच से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान लकड़ी तस्करी के मामले बढ़े हैं,लेकिन इसके लिए उन्होंने गोरखालैंड आंदोलन को जिम्मेदार ठहराया.
श्री बालोच ने बताया कि पहाड़ पर जारी बेमियादी बंद के दौरान दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में खासकर कालिम्पोंग इलाके में लकड़ी तस्करों की सक्रियता बढ़ गयी थी. बंद के कारण निगरानी में कमी आयी थी. इसी बंद का फायदा तस्करों ने उठाया और जंगलों से लकड़ियों को काटकर जमा कर लिया. अब उसी की तस्करी की जा रही है. उन्होंने कहा कि लकड़ियों की तस्करी रोकने के लिए वन विभाग चौकस है.
यही वजह है कि इतने बड़ पैमाने पर लकड़ियां ज्बत की जा रही है और तस्कर पकड़े जा रहे हैं.तस्करी पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है और इस मुख्यालय सिलीगुड़ी को बनाया गया है.
उन्होंने ही टास्क फोर्स बनाने का एक प्रस्ताव राज्य के मुख्य वनपाल को भेजा था,जिसकी मंजूरी मिल गयी. उसके बाद टास्क फोर्स द्वारा वन्य जीव तथा लकड़ी तस्करों के खिलाफ बड़े पैमान पर अभियान चलाया जा रहा है.
कोलकाता व बिहार सबसे बड़ा बाजार
श्री बालोच ने आगे बताया कि वन्य जीवों के साथ ही वन्य जीवों के अंग की तस्करी का सबसे बड़ा बाजार नेपाल है. तस्कर सिलीगुड़ी संलग्न सीमा से तस्करी कर इन सामानों को नेपाल ले जाते हैं और वहां से चीन और थाइलैंड आदि देशों को भेज दिया जाता है. जबकि लकड़ी का सबसे बड़ा बाजार कोलकाता और बिहार है. इन स्थानों पर लकड़ियों को भेजने के लिए सिलीगुड़ी का उपयोग करना ही पड़ेगा. यही कारण ही कि तस्कर सिलीगुड़ी शहर को एक हब के रूप में इस्तेमाल करते हैं.
रेंजरों की बढ़ायी गयी शक्ति
श्री बालोच ने आगे बताया कि लकड़ी तस्करी को रोकने के लिए रेंजरों की शक्ति बढ़ायी गयी है. बेलाकोबा रेंज को विशेष शक्ति दी गयी है. एक डिवीजन में वन विभाग के कई रेंज होते हैं. जिसकी वजह से कभी-कभी कोर्डिनेशन की कमी हो जाती है. बेलाकोबो रेंज को उत्तर बंगाल में किसी भी रेंज में जाकर छापामारी करने की शक्ति दी गयी है.
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