आरजी कर कांड की बरसी पर अभया को दी गयी श्रद्धांजलि
Published by : SUBODH KUMAR SINGH Updated At : 15 Aug 2025 1:19 AM
आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में गत वर्ष हुए रेप और हत्या कांड के विरोध में एक बार फिर नागरिक समाज और चिकित्सकों ने मिलकर न्याय की मांग उठायी.
न्याय की मांग को लेकर फिर सड़कों पर उतरेंगे डॉक्टर्स व आम नागरिक
कोलकाता. आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में गत वर्ष हुए रेप और हत्या कांड के विरोध में एक बार फिर नागरिक समाज और चिकित्सकों ने मिलकर न्याय की मांग उठायी. नौ अगस्त को मृतका अभया की पुण्यतिथि के अवसर पर मौलाली युवा केंद्र में एक नागरिक सम्मेलन आयोजित किया गया. इस मौके पर अभया को श्रद्धांजलि दी गयी और एक वर्ष पहले हुए इस अमानवीय कांड को याद किया गया.
गत वर्ष 14 अगस्त की रात आरजी कर मेडिकल कॉलेज में घटना के बाद भारी तोड़फोड़ हुई थी, जिसकी याद में इस वर्ष विशेष सम्मेलन रखा गया. सम्मेलन में सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास, कोषाध्यक्ष डॉ सपन विश्वास, मेडिकल सर्विस सेंटर के डॉ विप्लव चंद्रा, नर्सेस यूनिटी की भास्वती मुखर्जी, वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट के डॉ अनिकेत महाता और डॉ देवाशीष हाल्दार, शिक्षाविद् मिरातुन नाहर व मूर्तिकार असीत साई सहित कई गणमान्य उपस्थित थे.
सम्मेलन की शुरुआत अभया को श्रद्धांजलि देने से हुई. इस अवसर पर अभया की कांसे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये गये, जिसे मूर्तिकार असीत साई ने आंदोलनकारी डॉक्टरों को भेंट किया था. श्री साई ने बताया कि उनकी भी एक छोटी बेटी है और आरजी कर की घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, इसलिए उन्होंने अपने भावों को मूर्ति के रूप में अभिव्यक्त किया.
डॉ अनिकेत महाता ने कहा कि यह घटना आज भी हमारे लिए एक रहस्य बनी हुई है. उन्होंने सीबीआइ जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए बताया कि एक साल बीत जाने के बावजूद सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल नहीं की गयी. उनका कहना था कि जब तक अभया को न्याय नहीं मिलता, आंदोलन शांतिपूर्ण रूप से जारी रहेगा.
डॉ देवाशीष हाल्दार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि घटना के समय पुलिस ने उदासीनता दिखायी थी. लेकिन अब एक साल बाद वही पुलिस जूनियर और सीनियर डॉक्टरों को समन भेज रही है. यह नागरिक सम्मेलन अभया को न्याय दिलाने की दिशा में एक और प्रयास रहा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने मिल कर आवाज बुलंद की. आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जब तक पीड़िता को इंसाफ नहीं मिलता, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे.
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