440 करोड़ पर किसका हक? कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैंक से मांगी TMC के खातों की जानकारी

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TMC Fund War: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के 440 करोड़ रुपए वाले बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने के मामले में निजी बैंक को 7 जुलाई तक बैलेंस की जानकारी देने का आदेश दिया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि वे ऐसे सबूत पेश करेंगे, जो ‘अंतरात्मा को झकझोर’ देंगे.

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TMC Fund War: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों धड़ों के बीच ‘असली तृणमूल कौन’ की लड़ाई का एक बड़ा केंद्र बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपए भी हैं. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पार्टी के 3 बैंक खातों से लेन-देन पर लगी रोक (Debit Freeze) को चुनौती दी गयी है.

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8 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने संबंधित निजी बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 7 जुलाई तक इन 3 खातों में जमा सटीक राशि की पूरी जानकारी अदालत के समक्ष पेश करें. इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई के लिए तय कर दी है.

अंतरात्मा को झकझोर देंगे पुलिस के रिकॉर्ड : तुषार मेहता

बिधाननगर पुलिस का पक्ष रखने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में पेश हुए देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह फिलहाल कुछ दिनों तक इस मामले में कोई भी अंतरिम राहत या आदेश पारित न करे. मेहता ने पीठ को आश्वस्त करते हुए कहा कि पुलिस ने शुरुआती जांच पूरी कर ली है. वे अगली सुनवाई में ऐसे पुख्ता रिकॉर्ड कोर्ट के सामने रखेंगे, जिससे यह साबित हो जायेगा कि पैसे का बड़े पैमाने पर गबन (Embezzlement) किया जा रहा था. पुलिस के रिकॉर्ड अंतरात्मा को झकझोर देंगे.

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बैंक अकाउंट्स को संचालित करने का अधिकार किसका?

वर्तमान में मुख्य कानूनी सवाल यह है कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों में से किसे इन खातों को संचालित करने का कानूनी अधिकार है. जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत इस विकल्प पर भी विचार कर रही है कि क्या इस कानूनी विवाद के लंबित रहने तक इन तीनों खातों को संयुक्त विशेष अधिकारियों (Joint Special Officers – जो अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे) के माध्यम से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है?

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खाते फ्रीज करने की क्या जल्दबाजी थी? : हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की टाइमलाइन पर गौर किया. कोर्ट ने कहा कि बिधाननगर पुलिस के साइबर अपराध थाने में 18 जून को शाम 6 बजे प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई और अगले ही दिन 19 जून को बैंक ने ममता गुट को लिखित सूचना दे दी कि उनके खातों से धन निकासी पर रोक लगा दी गयी है. इस पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पूछा कि ऐसी क्या जल्दबाजी थी और जांच एजेंसी के पास शुरुआती तौर पर ऐसे क्या पुख्ता सबूत थे कि तुरंत खातों को फ्रीज कर दिया गया?

TMC Fund War: कोर्ट रूम में सिंघवी बनाम कौल

  • ममता के वकील ने तुरंत पैसे निकालने की अनुमति मांगी : ममता बनर्जी खेमे की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि किसी सक्रिय राजनीतिक दल के खातों पर पूरी तरह रोक लगाकर उसे पंगु बनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समान अवसर (Level Playing Field) के सिद्धांत के खिलाफ है. यह कदम मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. सिंघवी ने स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की हार हुई है. उनके सदस्यों की संख्या घटी है, लेकिन सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके हारने वाली पार्टी को इस तरह पंगु नहीं किया जा सकता. उन्होंने खातों से तुरंत पैसे निकालने की अंतरिम अनुमति मांगी.
  • रीतब्रत के वकील ने याचिका की वैधता पर उठाये सवाल : बागी विधायकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने इस याचिका की वैधता (Maintainability) पर ही सवाल उठा दिये. कौल ने कहा कि पार्टी की एक नयी राष्ट्रीय समिति नियुक्त की जा चुकी है. इसलिए ममता गुट को इन खातों के संचालन की मांग करने का कोई कानूनी हक ही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी गुट पार्टी की छवि खराब करने के लिए इन खातों के जरिये गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन करने की फिराक में था, जिसकी जांच पुलिस कर रही है.

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े के विधायकों ने बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज करायी. बागी विधायकों ने आरोप लगाया है कि इन 3 बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपए का स्रोत संदिग्ध है और यह राशि कट मनी, घोटालों और जनता के पैसों के दुरुपयोग से अर्जित की गयी हो सकती है, जिसकी विस्तृत जांच जरूरी है.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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