कोलकाता/नयी दिल्ली
. कलकत्ता उच्च न्यायालय में नौ जनवरी को अनियंत्रित भीड़ के कारण हुई अव्यवस्था और हंगामे पर उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को चिंता जतायी. इडी द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आइ-पैक) के कार्यालय में की गयी तलाशी और जब्ती से संबंधित मामलों की निर्धारित सुनवाई हंगामे के कारण स्थगित करनी पड़ी थी. प्रवर्तन निदेशालय (इडी) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ को बताया कि तृणमूल कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ ने वॉट्सएप संदेश प्रसारित किये थे, जिसमें लोगों से अदालत में इकट्ठा होने के लिए कहा गया था. मेहता ने कहा कि कृपया इस मामले में जो हुआ उसे देखें. हमने (कलकत्ता) उच्च न्यायालय का रुख किया. यही होता है, जब भीड़तंत्र लोकतंत्र की जगह ले लेता है. उच्च न्यायालय में यही चीज हुई.उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग अदालत कक्ष में घुस आये और हंगामा किया. उन्होंने बताया कि पीठ ने कहा कि सुनवाई के लिए यह अनुकूल स्थिति नहीं है. सॉलिसिटर जनरल ने कहा : मैंने सत्तारूढ़ पार्टी के विधि विभाग की वॉट्सएप चैट रिकॉर्ड पर रखी है. यह घटना स्वतः स्फूर्त नहीं थी, बल्कि पार्टी के विधि प्रकोष्ठ द्वारा उन्हें वहां जाने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद पीठ ने टिप्पणी की कि सब लोग आइये? जैसे कि यह जंतर-मंतर हो.मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय को जंतर-मंतर में तब्दील कर दिया गया था. उन्होंने कहा : बसें और वाहन उपलब्ध कराये गये थे. उन्होंने बताया कि तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को एक याचिका दायर की और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को यह आदेश पारित करना पड़ा कि मामले में पेश होने वाले वकीलों के अलावा किसी को भी अदालत कक्ष में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जायेगी.
मेहता ने कहा कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया गया और सुनवाई संतोषजनक नहीं रही. इडी को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और माइक्रोफोन निरंतर म्यूट किया जा रहा था.सिब्बल ने दिया आश्वासन, दोबारा नहीं होगा : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेऊश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जब अपनी दलीलें शुरू कीं, तो पीठ ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय में हुईं घटनाएं चिंताजनक हैं. न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय में हंगामे के कारण सुनवाई स्थगित किये जाने से हम चिंतित हैं. सिब्बल ने अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा.
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