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सरकार ने देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ताक पर रखा : कल्याण बनर्जी

Updated at : 14 Dec 2024 12:50 AM (IST)
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सरकार ने देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ताक पर रखा : कल्याण बनर्जी

तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में संविधान की 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावना में भी है.

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एजेंसियां, कोलकाता/नयी दिल्ली.

केंद्र सरकार पर देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को ताक पर रखने का आरोप लगाते हुए तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि हमें संविधान को समझने के लिए इसमें दिये गये हर शब्द की व्याख्या को व्यापक अर्थों में समझना होगा. तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में संविधान की 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और इसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावना में भी है. संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े जाने से पहले देश में हर प्रधानमंत्री, हर मुख्यमंत्री ने इसे धर्मनिरपेक्ष माना. दुर्भाग्य से इस सरकार के पिछले 10 साल के कार्यकाल में देश में धर्मनिरपेक्ष तानाबाना ताक पर रख दिया गया.

बनर्जी ने सत्तारूढ़ भाजपा पर धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का भी आरोप लगाते हुए दावा किया कि इस भेदभाव के कारण अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना है. सत्तारूढ़ भाजपा और उनके सहयोगियों के उग्र हिंदुत्व की वजह से ऐसा माहौल है. संविधान की 75 साल की यात्रा की बात करें, तो हमें पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ मनमोहन सिंह तक को श्रेय देना होगा. इसमें कोई प्रधानमंत्री छूट नहीं सकता. तृणमूल सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान की गौरवशाली यात्रा केवल 10 वर्ष की नहीं है. उक्त चर्चा की शुरुआत करने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण में यह सुनने को नहीं मिला कि इन 75 वर्ष में कौन सा कालखंड गौरवशाली था और कौन सा नहीं. मैं प्रधानमंत्री से इस चर्चा के उत्तर में सुनना चाहूंगा कि कौन सा कालखंड गौरवशाली था और कौन सा नहीं. हमें संविधान को समझना है, तो हमें इसमें दिये गये हर शब्द की व्याख्या को व्यापक अर्थों में समझना होगा. पिछले 10 साल में भाजपा ने संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने, मौलिक अधिकारों को कम करने का काम किया है.

तृणमूल सांसद ने मणिपुर में हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकारें उचित समय पर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कार्रवाई नहीं करतीं, तो लोकतंत्र खतरे में होता है. क्या मणिपुर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हुई. अगर सही समय पर लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं हुई, तो कोई लाभ नहीं. मणिपुर में लोकतंत्र को क्यों कमजोर किया गया? प्रधानमंत्री मणिपुर की समस्या क्यों नहीं सुन पा रहे? प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल गये, तो उन्होंने संदेशखाली को लेकर कहा था कि यह देश का अंग है और यहां की महिलाएं देश की बेटियां हैं. मेरा सवाल है कि प्रधानमंत्री जी, क्या मणिपुर देश का अंग नहीं है? क्या मणिपुर की बेटियां देश की बेटियां नहीं हैं? क्या वहां की नारी का सम्मान देश की महिलाओं का सम्मान नहीं है? आपने (मणिपुर के लिए) क्या किया? आप इंतजार कर रहे हैं. कुछ नहीं कर रहे. उन्होंने संभल हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति के सर्वे के नाम पर कुछ लोगों की जान चली गयी, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे. प्रधानमंत्री होने के नाते आपकी जिम्मेदारी उन्हें बचाने की है. आप केवल अपने राजनीतिक दल के नफरत के एजेंडा को नहीं साध सकते. मौजूदा सरकार भले ही आंकड़ों से खुश होती रहे, लेकिन देश की गरीब जनता बेरोजगारी, कुपोषण, गरीबी, मानसिक स्वास्थ्य आदि समस्याओं से जूझ रही है.”

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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