विस पहुंचे शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने स्पीकर के सामने रखीं पांच मांगें

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विस पहुंचे शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने स्पीकर के सामने रखीं पांच मांगें

कोर्ट के आदेश पर नौकरी से वंचित योग्य शिक्षक फिर से परीक्षा नहीं देना चाहते

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कोर्ट के आदेश पर नौकरी से वंचित योग्य शिक्षक फिर से परीक्षा नहीं देना चाहते कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने शिक्षकों की नयी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस प्रक्रिया में 2016 के रद्द किये गये पैनल से बाहर हुए शिक्षकों को दोबारा नौकरी पाने का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी. यही शर्त अब विवाद का कारण बन गयी है. ‘हम फिर क्यों परीक्षा दें’: बेरोजगार शिक्षक: योग्यता के बावजूद नौकरी गंवा चुके शिक्षक फिर से परीक्षा देने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि जब वे पहले से ही योग्य साबित हो चुके हैं, तो दोबारा परीक्षा देने की जरूरत क्यों हो. शुक्रवार को ऐसे शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल विधानसभा पहुंचा और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि योग्य बेरोजगारों की सूची प्रकाशित की जाये और योग्यता के आधार पर बिना शर्त उन्हें नौकरी वापस दी जाये. प्र तिनिधिमंडल ने स्पीकर के सामने कुल पांच मांगें रखीं. इनमें ओएमआर शीट की मिरर इमेज देने, योग्य और अयोग्य उम्मीदवारों की अलग-अलग सूची प्रकाशित करने और मुख्यमंत्री से चर्चा कराने की मांग शामिल है. स्पीकर ने आश्वासन दिया, प्रक्रिया जारी: सूत्रों के अनुसार, स्पीकर बिमान बनर्जी ने शिक्षकों की बात गंभीरता से सुनी और मांगों पर विचार का आश्वासन दिया. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ही राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में की गयी शिक्षक भर्ती को “संस्थागत भ्रष्टाचार ” बताते हुए रद्द कर दिया था. इससे करीब 26 हजार शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी नौकरी से बाहर हो गये थे. इसके बाद 30 मई को राज्य सरकार ने नयी भर्ती प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी की. 16 जून से फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होनी है और अगले तीन महीनों में पूरी भर्ती प्रक्रिया संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर विरोध जारी है. योग्य उम्मीदवारों का कहना है कि उनका हक छीना गया है और अब उनका फिर से परीक्षा देना तर्कसंगत नहीं है. उनका कहना है कि राज्य सरकार को उनका मूल्यांकन पहले की ही तरह स्वीकार करना चाहिए और बिना किसी शर्त के उनकी बहाली करनी चाहिए.

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Sandip Tiwari

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