पश्चिम बंगाल का बजट : शुभेंदु अधिकारी ने ‘लेखा अनुदान मांग’ को बताया ‘फर्जी दस्तावेज’

पश्चिम बंगाल के लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी.
पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा चुनाव 2026 से पहले विधानसभा में अंतरिम बजट पेश कर दिया. 4.06 लाख करोड़ रुपए के इस बजट में युवाओं, महिलाओं और समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर फोकस किया गया है. इस लोकलुभावन बजट की आलोचना करते हुए लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी ने इसे फर्जी दस्तावेज करार दिया है.
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पश्चिम बंगाल के लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के विधानसभा में पेश ‘लेखा अनुदान मांग’ की आलोचना की. उन्होंने इसे ‘झूठा और लक्ष्यहीन दस्तावेज’ करार दिया. वरिष्ठ भाजपा नेता ने दावा किया कि यह दस्तावेज चुनाव से प्रेरित वादों से भरा है. कानूनी रूप से इन्हें लागू करना असंभव है.
सरकार की घोषणाएं भ्रामक – शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने अंतरिम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अधिकांश घोषणाएं भ्रामक हैं, क्योंकि आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होने के बाद उन्हें क्रियान्वित नहीं किया जा सकता.
14 फरवरी के बाद कभी भी लागू हो सकती है आचार संहिता – शुभेंदु
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची (14 फरवरी को) प्रकाशित होने के बाद, किसी भी समय आचार संहिता लागू हो सकती है. एमसीसी के तहत, सरकार वित्तीय लाभों में वृद्धि नहीं कर सकती है या लाभार्थियों की संख्या नहीं बढ़ा सकती है.
लेखा अनुदान मांग सिर्फ 4 महीने की व्यवस्था – अधिकारी
उन्होंने कहा कि लेखा अनुदान मांग को केवल 4 महीने की व्यवस्था है. इसका उद्देश्य वेतन जैसे नियमित खर्चों को पूरा करना है. शुभेंदु ने कहा कि अप्रैल से लागू होने वाले वादे ‘धोखे के सिवा कुछ नहीं’ हैं.
ममता बनर्जी सरकार का बजट बेरोजगार विरोधी – शुभेंदु
बजट को ‘बेरोजगार विरोधी’ करार देते हुए भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इसमें रोजगार के कोई ठोस लक्ष्य तय नहीं हैं. शुभेंदु अधिकारी ने कथित तौर पर ‘युवाश्री’ योजना का नाम बदलकर ‘युवा साथी’ किये जाने की आलोचना की. कहा कि यह ‘चालाकी और धोखा’ है. इस योजना के तहत 1,500 रुपए मासिक भत्ता दिया जाता है.
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अंतरिम बजट में महिला सुरक्षा का कोई जिक्र नहीं – नेता प्रतिपक्ष
उन्होंने कहा कि जॉब पोर्टल और युवा भत्ते के वादे बार-बार नाम बदलकर छोड़ दिये गये. अब तक इन पर अमल नहीं हुआ. भाजपा नेता ने दावा किया कि अंतरिम बजट में महिलाओं की सुरक्षा का कोई जिक्र नहीं है. शुभेंदु ने आरोप लगाया कि सरकार मूलभूत सामाजिक चिंताओं को दूर करने में विफल रही है.
भाजपा सत्ता में आयी, तो लक्ष्मीर भंडार की राशि 3000 रुपए होगी – शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आती है, तो ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाने की संभावना तलाशने के लिए एक समिति का गठन करेगी. उन्होंने संकेत दिया कि सहायता राशि बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति माह की जा सकती है. उन्होंने वादा किया कि भाजपा सरकार सत्ता संभालने के 6 महीने के भीतर रोजगार संबंधी मुद्दों का समाधान करेगी.
बंगाल में 4.06 लाख करोड़ का अंतरिम बजट पेश
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपए का अंतरिम बजट पेश किया. इसमें 3 महीने से भी कम समय में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं, युवाओं और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को लक्षित करते हुए नकद सहायता और भत्ते में वृद्धि के प्रावधान किये गये हैं.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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