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महंगाई भत्ता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से झूमे आंदोलनकारी, बांटे लड्डू

Updated at : 05 Feb 2026 8:52 PM (IST)
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Supreme Court Decision on Dearness Allowance Makes Agitators Happy

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जश्न मनाते संग्रामी यौथ मंच के सदस्य. फोटो : एएनआई

पश्चिम बंगाल राज्य के सरकारी कर्मचारियों में बृहस्पतिवार को उस वक्त खुशी की लहर दौड़ गयी, जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि 2008 से 2019 तक के महंगाई भत्ता का एरियर का भुगतान करे. कर्मचारी यूनियनों ने फैसले का जश्न मनाया. अपने साथियों के बीच लड्डू बांटे.

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पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इसके लिए आंदोलन कर रहे लोग झूमने लगे हैं. धर्मतला के शहीद मीनार मैदान में विरोध कर रहे ज्वाइंट प्लेटफार्म के नेता इस फैसले से बेहद खुश हैं. इन्होंने मिठाइयां बांटी.

केंद्र और राज्य सरकार के डीए में 40 फीसदी का है अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों को अगस्त 2008 से दिसंबर 2019 तक के डीए एरियर का 25 फीसदी राशि का भुगतान मार्च तक कर दे. अभी भी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारियों के डीए में 40 फीसदी का अंतर है. फैसले पर माकपा समर्थित सरकारी कर्मचारियों का संगठन गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऑर्गेनाइजेशन को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने खुशी जतायी है.

  • माकपा समर्थित गवर्नमेंट इम्प्लॉइज ऑर्गेनाइजेशन को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने कहा- आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे
  • संग्रामी यौथ मंच ने कहा- सरकार को फैसला मानने पर करेंगे मजबूर
  • तृणमूल समर्थित पश्चिम बंगाल सरकारी कर्मचारी फेडरेशन ने कहा – सीएम ने कभी नहीं कहा कि सरकारी कर्मचारियों को मंहगाई भत्ता नहीं देंगे
  • बंगाल टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स एसोसिएशन ने कहा – यह फैसला पूरे देश के कर्मचारियों की जीत

संग्रामी यौथ मंच ने धरनास्थल पर बांटे लड्डू

कमेटी के विश्वजीत गुप्ता चौधरी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को बकाया एरियर का 25 फीसदी देने को कहा है. हम अभी भी बकाया डीए (केंद्र और राज्य डीए के बीच का अंतर) का 40 फीसदी पाने के हकदार हैं. हम आगे भी लड़ेंगे और अपना हक लेकर रहेंगे. डीए के लिए आंदोलन कर रहे संग्रामी यौथ मंच के लोगों ने धरना मंच पर लड्डू बांटे. संगठन के संयोजक भास्कर घोष ने कहा कि शीर्ष अदालत ने जो कमेटी बनायी है, उनके साथ हमलोग भी बैठ सकें, इसके लिए आवेदन करेंगे.

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कोर्ट के फैसले के बाद भी निश्चिंत नहीं कर्मचारी यूनियन

उन्होंने कहा कि बैठक में बतायेंगे कि डीए का भुगतान करने के लिए सरकार सक्षम है. सरकार की वित्तीय हालत बिल्कुल खराब नहीं है. हमलोग तथ्यों के साथ इसे पेश करेंगे. शीर्ष अदालत के फैसले के बाद भी वे पूरी तरह से निश्चिंत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सड़क पर उतरना होगा, तभी यह मिल पायेगा. सरकार को फैसला मानने पर मजबूर करेंगे.

बंगाल टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स एसोसिएशन ने किया फैसले का स्वागत

बंगाल टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स एसोसिएशन ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. संगठन के नेता स्वपन मंडल ने कहा कि यही होना था. 10 साल के लंबे संघर्ष के बाद यह जीत न केवल हमारे राज्य के शिक्षकों और कर्मचारियों की जीत है, बल्कि पूरे देश के कर्मचारियों की भी जीत है. कोई भी दूसरी राज्य सरकार इस घिनौनी कर्मचारी विरोधी सरकार के रास्ते पर चलने की हिम्मत नहीं करेगी.

तृणमूल समर्थित यूनियन ने कहा- ममता बनर्जी ने कभी नहीं कहा कि डीए नहीं देंगे

तृणमूल समर्थित पश्चिम बंगाल सरकारी कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक प्रताप नाइक ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कभी नहीं कहा कि सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा. उनका मानना है कि अगर मौका मिलता, तो मुख्यमंत्री सरकारी कर्मचारियों की मांगों को पूरा करतीं. नाइक ने कहा- मैं देश की सबसे बड़ी अदालत के आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. अब जब अदालत ने आदेश दे दिया है, तो हम उस प्रक्रिया के साथ रहेंगे, जिसमें राज्य सरकार उस आदेश को लागू करेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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