श्रीनगर में फंसे जेयू छात्र को घर जाने की उम्मीद जगी
Updated at : 13 May 2025 11:10 PM (IST)
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कोलकाता से करीब दो हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा करने के बावजूद जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के छात्र जाहिद खान श्रीनगर से जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के नजदीक स्थित अपने गांव तंगधार की 200 किलोमीटर की दूरी गत करीब एक सप्ताह में भी तय नहीं कर पाये. जाहिद कोलकाता से जब घर जा रहे थे, तभी भारत-पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष की वजह से श्रीनगर में फंस गये. लेकिन सीमा पर शांति लौटने के साथ ही उनके अपने गांव जाने की उम्मीदें बढ़ गयी हैं.
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कोलकाता.
कोलकाता से करीब दो हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा करने के बावजूद जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के छात्र जाहिद खान श्रीनगर से जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के नजदीक स्थित अपने गांव तंगधार की 200 किलोमीटर की दूरी गत करीब एक सप्ताह में भी तय नहीं कर पाये. जाहिद कोलकाता से जब घर जा रहे थे, तभी भारत-पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष की वजह से श्रीनगर में फंस गये. लेकिन सीमा पर शांति लौटने के साथ ही उनके अपने गांव जाने की उम्मीदें बढ़ गयी हैं. जाहिद जेयू से राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर रहे हैं. वह ड्रोन हमलों और तोपखाने की गोलाबारी बंद होने के बाद अब अपने बुजुर्ग माता-पिता और भाई-बहनों से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. वह करीब एक हफ्ते से श्रीनगर में एक दोस्त के घर रह रहे हैं.उन्होंने मंगलवार को श्रीनगर से फोन पर बात की. उन्होंने कहा : मेरे बुजुर्ग माता-पिता, छोटी बहन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ-साथ कुछ पड़ोसियों ने सात मई से 11 मई तक तंगधार में एक बंकर में शरण ली. भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के मद्देनजर पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमलों और तोपखाने की गोलाबारी के कारण लोगों को नियंत्रण रेखा के पास स्थित उनके घरों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था. वह छह मई को श्रीनगर पहुंचे थे, लेकिन उस समय पैदा हुई स्थिति की वजह से कुपवाड़ा नहीं जा सके. तनाव कम होने के बाद जाहिद अब यथाशीघ्र तंगधार जाने की योजना बना रहे हैं, जो श्रीनगर से सड़क मार्ग से 200 किलोमीटर दूर है, ताकि वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता सकें. उन्होंने कहा :मेरी सुरक्षा के मद्देनजर माता-पिता नहीं चाहते कि मैं उनसे मिलने जाऊं. वे पिछले छह दिन से वाट्सएप पर अपने वीडियो और तस्वीरें भेज रहे हैं, लेकिन मुझे वहां जाना ही होगा. उम्मीद है कि हवाई टिकटों की उपलब्धता और उनकी सामर्थ्य के आधार पर मैं एक महीने में कोलकाता भी लौट आऊंगा. हम आतंकवाद का खात्मा चाहते हैं. हम बिना किसी गोलाबारी या ड्रोन हमले के शांति से रहना चाहते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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