आयोग के निर्देशों पर 21 तक अमल करेगी राज्य सरकार

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आयोग के निर्देशों पर 21 तक अमल करेगी राज्य सरकार

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत बुधवार को निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश हुए.

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मतदाता सूची विवाद को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से दिल्ली में मिले मुख्य सचिव

कोलकाता/नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत बुधवार को निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश हुए. आयोग ने उन्हें मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर ‘दागी’ अधिकारियों को निलंबित नहीं करने के राज्य सरकार के फैसले पर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया था. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को आश्वस्त किया है कि आगामी 21 अगस्त तक आयोग के निर्देशानुसार संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी. हालांकि, इस बारे में राज्य के मुख्य सचिव व निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.

गौरतलब है कि मुख्य सचिव शाम करीब साढ़े चार बजे निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचे और शाम करीब छह बजे वहां से चले गये. करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के दौरान आयोग के अधिकारियों ने पंत से आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करने पर स्पष्टीकरण मांगा. सूत्रों के अनुसार, डॉ मनोज पंत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की.बैठक के बारे में पूछे जाने पर, डॉ पंत ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

आयोग ने मंगलवार को पंत को दिल्ली बुलाया था और उन्हें 13 अगस्त को शाम पांच बजे तक राष्ट्रीय राजधानी स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा था.

यह कदम सोमवार को आयोग को पंत द्वारा भेजे गए पत्र के जवाब में उठाया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आयोग द्वारा चिह्नित अधिकारियों को निलंबित करना और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना ‘बेहद कठोर’ कदम होगा तथा इससे बंगाल में अधिकारियों का ‘मनोबल’ गिरेगा.

राज्य सरकार ने पांच अधिकारियों के निलंबन और उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के चुनाव आयोग के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था.

क्या है मामला

मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया के दाैरान गड़बड़ी करने के आरोप में बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के इआरओ देबोत्तम दत्ता चौधरी, एइआरओ तथागत मंडल, मोयना के इआरओ बिप्लव सरकार, एइआरओ सुदीप्त दास और डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरजीत हालदार पर कार्रवाई का आदेश दिया गया था. चुनाव आयोग ने इन सभी को निलंबित करने और उनके खिलाफ 1950 के जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिया था. लेकिन सोमवार को मुख्य सचिव ने आयोग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि चार में से केवल दो अधिकारियों बारुईपुर पूर्व के डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरजीत हलदर और मोयना के एइआरओ सुदीप्त दास को चुनावी कार्य से मुक्त किया गया है, जबकि निलंबन व एफआइआर की कार्रवाई नहीं की जायेगी. इसके बाद आयोग ने मुख्य सचिव को तलब किया.

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