केस डायरी पर टकराव, विशेष एनआइए अदालत की राज्य पुलिस को फटकार

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केस डायरी पर टकराव, विशेष एनआइए अदालत की राज्य पुलिस को फटकार

इस मामले में जिला पुलिस द्वारा गिरफ्तार 31 आरोपियों को बहरमपुर संशोधनागार से अदालत में पेश किया गया.

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कोलकाता. झारखंड में पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में भड़की हिंसा से जुड़े मामले में केस डायरी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को नहीं सौंपे जाने पर विशेष एनआइए अदालत ने गुरुवार को राज्य पुलिस को कड़ी फटकार लगायी. विचार भवन स्थित विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एसजी मजूमदार ने राज्य के वकील से तीखा सवाल किया कि क्या एनआइए केस डायरी लेकर भाग जायेगी?

इस मामले में जिला पुलिस द्वारा गिरफ्तार 31 आरोपियों को बहरमपुर संशोधनागार से अदालत में पेश किया गया. एनआइए के वकीलों ने सात आरोपियों को सात दिनों की एनआइए हिरासत में भेजने और शेष 24 को न्यायिक हिरासत में रखने की मांग की. एजेंसी की ओर से कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर जांच की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को एनआइए को न सौंपने का कोई निर्देश नहीं दिया है. केस डायरी नहीं मिलने से जांच प्रभावित हो रही है और सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल करने में भी दिक्कत आ रही है.

राज्य की ओर से अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एनआइए के जांच अधिकार को ही उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है. केस डायरी हस्तांतरण के आदेश के खिलाफ भी उच्च न्यायालय में आवेदन लंबित है और उसी दिन सुनवाई निर्धारित है. ऐसे में एक-दो दिन का समय दिया जाये और यहां की सुनवाई स्थगित रखी जाये.

आरोपियों के वकील ने भी कहा कि जमानत अर्जी दाखिल करने को लेकर भ्रम की स्थिति है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि केस डायरी किस एजेंसी को सौंपी जायेगी. उल्लेखनीय है कि इससे पहले पर्याप्त पुलिस बल की कमी का हवाला देकर जिला पुलिस पर तीन बार आरोपियों को अदालत में सशरीर पेश नहीं करने का आरोप लगा था. हालांकि इस बार मुर्शिदाबाद पुलिस ने सभी आरोपियों को सुरक्षा के बीच कोलकाता स्थित अदालत में पेश किया.

बेलडांगा घटना में निचली अदालत ने आदेश दिया था कि केस डायरी गुरुवार दोपहर दो बजे तक एनआइए को सौंप दी जाये. इस आदेश पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने कलकत्ता हाइकोर्ट का रुख किया. लेकिन सुनवाई के दौरान कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया. मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिविजन बेंच ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई स्थगन आदेश जारी नहीं किया जायेगा.

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