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जेयू के कार्यवाहक कुलपति को सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले पद से हटाया गया

Updated at : 29 Mar 2025 12:48 AM (IST)
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जेयू के कार्यवाहक कुलपति को सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले पद से हटाया गया

डॉ बोस ने गुप्ता को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था. राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं.

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राज्यपाल ने जारी किया आदेश कोलकाता. राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले जादवपुर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ भास्कर गुप्ता को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. राजभवन ने एक बयान में यह जानकारी दी. डॉ बोस ने गुप्ता को कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था. राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं. राज्यपाल सचिवालय ने 27 मार्च को जारी एक बयान में कहा: 20 अप्रैल, 2024 के आदेश से प्रोफेसर भास्कर गुप्ता को जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति की शक्तियों का इस्तेमाल करने और कर्तव्यों का पालन करने के लिए अधिकृत किया था, लेकिन इसे वापस ले गया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा. नोटिस में यह भी कहा गया कि इस निर्णय को कुलाधिपति द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है तथा इसकी एक प्रति आवश्यक कार्रवाई के लिए रजिस्ट्रार को भेज दी गयी है. पिछले सप्ताह जब राज्यपाल से यह पूछा गया था कि क्या गुप्ता को उनका कार्यकाल बढ़ाकर स्थायी कुलपति बनाया जायेगा या फिर खोज समिति की सिफारिशों के आधार पर नया कुलपति नियुक्त किया जायेगा, तो उन्होंने संवाददाताओं से कहा था: आपको पत चल जायेगा कि वह सेवानिवृत्त होते हैं या फिर (कुलपति के तौर पर) वापसी करते हैं. हम सही समय पर उचित निर्णय लेंगे. पूर्व कुलपति सुरंजन दास का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, जादवपुर विश्वविद्यालय डेढ़ साल से अधिक समय से स्थायी कुलपति के बिना काम कर रहा है. जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) के महासचिव पार्थ प्रतिम रॉय ने कहा: हमने हाल में राज्यपाल को पत्र लिखकर उनसे अनिश्चितता समाप्त करने की अपील की है, क्योंकि स्थायी कुलपति की लंबे समय से अनुपस्थिति विश्वविद्यालय में प्रशासनिक और शैक्षणिक दोनों कामकाज को प्रभावित कर रही है. हमें उम्मीद है कि गतिरोध जल्द ही समाप्त हो जायेगा. इस बीच, अंग्रेजी विभाग के प्रमुख और सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के समर्थक ‘वेस्ट बेंगाल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स एसोसिएशन (डब्ल्यूबीसीयूपीए)’ के पदाधिकारी मनोजीत मंडल ने बोस के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि यही मानक सभी विश्वविद्यालयों में लागू नहीं किया गया है. गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में गत एक मार्च से ही अशांति का माहौल है, जब छात्र चुनावों के लिए हिंसक विरोध प्रदर्शन किया गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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