अब डब्ल्यूबीएसएससी ने भी फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

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अब डब्ल्यूबीएसएससी ने भी फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

25,753 शिक्षक व गैरशिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने का मामला

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25,753 शिक्षक व गैरशिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने का मामला कोलकाता. पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) ने राज्य संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को रद्द करने के फैसले की समीक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है. पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा पर्षद व राज्य सरकार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की है. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने तीन अप्रैल को कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें राज्य द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य करार दिया गया था और पूरी चयन प्रक्रिया को ‘भ्रष्ट’ करार दिया गया था. शीर्ष अदालत ने 17 अप्रैल को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा बेदाग पाये गये बर्खास्त शिक्षकों की सेवाओं को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया था. ऐसा राज्य सरकार की इस दलील पर गौर करने के बाद किया गया था कि सामूहिक बर्खास्तगी से स्कूलों में पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. प्रधान न्यायाधीश द्वारा लिखे गये 41 पृष्ठों के फैसले में कहा गया, ‘यह एक ऐसा मामला है जिसमें पूरी चयन प्रक्रिया को दागदार बना दिया गया. बड़े पैमाने पर हेराफेरी और धोखाधड़ी की गयी. चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और वैधता ही समाप्त हो गयी है.’ उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘हमें उच्च न्यायालय के इस निर्देश में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार या कारण नहीं मिला कि जहां भी दागी उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई है, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए और उन्हें प्राप्त वेतन/भुगतान वापस करने के लिए कहा जाना चाहिए. चूंकि उनकी नियुक्तियां हेराफेरी, जालसाजी के जरिये हुई थी, इसलिए यह धोखाधड़ी के बराबर है. इसलिए, हमें इस आदेश को बदलने का कोई औचित्य नहीं दिखता है.’ यह मामला पश्चिम बंगाल एसएससी द्वारा 2016 में आयोजित नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जिसमें 24,640 पदों के लिए 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे और कुल 25,753 नियुक्ति पत्र जारी किये गये थे. शीर्ष अदालत ने इसे ‘व्यवस्थित धोखाधड़ी’ बताया है. पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य और जीवन कृष्ण साहा उन आरोपियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ भर्ती घोटाले की जांच की जा रही है.

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