पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन रिहाई अभी नहीं

पश्चिम बंगाल शिक्षक नियुक्ति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार से जुड़े सीबीआइ के मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है.
पूर्व कुलपति सुबिरेश भट्टाचार्य व पूर्व अधिकारी शांति प्रसाद सिन्हा को भी शीर्ष अदालत से मिली जमानत
संवाददाता, कोलकातापश्चिम बंगाल शिक्षक नियुक्ति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार से जुड़े सीबीआइ के मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए पार्थ चटर्जी समेत मामले में अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है. पार्थ चटर्जी ने 2022 के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की जांच को चुनौती दी थी. उनके साथ पूर्व कुलपति सुबीरेश भट्टाचार्य और अधिकारी शांतिप्रसाद सिन्हा को भी जमानत मिली है. हालांकि, इस दौरान सीबीआइ ने पार्थ चटर्जी की जमानत का जोरदार विरोध किया.तीन महीने बाद ही रिहाई संभव: हालांकि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी पार्थ चटर्जी की रिहाई तुरंत नहीं होगी, बल्कि यह तीन महीने बाद निचली अदालत की तरफ से तय किये जाने वाले बेल बॉन्ड पर निर्भर करेगी. शीर्ष अदालत के जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने जमानत देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट उनके ऊपर चार्ज गठन करने को लेकर आज से चार सप्ताह के भीतर सुनवाई पूरी करेगा. इसके बाद अगले दो महीने में मामले से जुड़े गवाहों की गवाही पूरी की जायेगी. इस प्रक्रिया के बाद ही पार्थ चटर्जी की रिहाई का रास्ता साफ होगा.यह पहली बार नहीं है जब पार्थ चटर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. इससे पहले 13 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें जमानत दी थी. उस आदेश के तहत भी उनकी जमानत 1 फरवरी 2025 से लागू हुई थी, यानी लगभग तीन महीने बाद. ठीक उसी तरह अब सीबीआइ केस में भी उनकी रिहाई तीन महीने बाद हो सकती है.
गौरतलब है कि राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को स्कूल जॉब के लिए कैश मामले में 151.26 करोड़ रुपये के कुल घोटाले की राशि में सबसे ज्यादा लाभार्थी दिखाया गया है, जैसा कि इसके पांचवें और अंतिम पूरक आरोपपत्र में विस्तार से बताया गया है.कोलकाता में विशेष धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में दायर पूरक आरोपपत्र के अनुसार, इडी ने कुल 151.26 करोड़ रुपये जब्त किये थे. इसमें चटर्जी और मुखर्जी के 103.78 करोड़ रुपये है. जब्त की गयी रकम में नकदी और सोना के साथ कुर्क की गई अचल संपत्ति शामिल है.
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