यह सीट आपकी है, राज्यपाल के सम्मान भरे शब्दों से अभिभूत हुई महिला टीचर

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यह सीट आपकी है, राज्यपाल के सम्मान भरे शब्दों से अभिभूत हुई महिला टीचर

ट्रेन में राज्यपाल की सहयात्री शिक्षिका प्रभावित हुई सीवी आनंद बोस के व्यवहार से

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ट्रेन में राज्यपाल की सहयात्री शिक्षिका प्रभावित हुई सीवी आनंद बोस के व्यवहार से कोलकाता. राज्यपाल सीवी आनंद बोस मंगलवार को मुर्शिदाबाद पहुंचने वाले थे. वे हजारदुआरी एक्सप्रेस से रानाघाट से ब्रह्मपुर पहुंचे. राज्यपाल की ट्रेन यात्रा में अन्य सहयात्री भी थे. उनकी बगल वाली सीट पर एक शिक्षिका बैठी थीं. उन्हें बैठने में दिक्कत हो रही थी. कई लोगों ने उन्हें हटने को कहा, लेकिन राज्यपाल शिक्षिका के बगल में खड़े रहे. उन्होंने दूसरों को समझाया कि यह सीट शिक्षिका की है. शिक्षिका राज्यपाल के व्यवहार से काफी प्रभावित हो गयीं. बातचीत काफी देर तक चली. फिर टीचर ने स्कूल में आने का निमंत्रण दिया. राज्यपाल शिक्षिका के साथ उनके स्कूल गये. न केवल गये, बल्कि उन्होंने छात्रों के बीच चॉकलेट भी बांटी. उन्होंने स्कूल के विकास के लिए 10,000 रुपये का चेक दिया. उन्होंने 2 लाख रुपये देने का भी वादा किया. मंगलवार को राज्यपाल भारत-बांग्लादेश सीमा का निरीक्षण करने मुर्शिदाबाद गये थे. सोमवार को वह हकीमपुर गये थे. वह भारत-बांग्लादेश सीमा की स्थिति और बांग्लादेशियों की वापसी से जुड़े सभी मुद्दों पर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट देंगे, इसीलिए वह मंगलवार को मुर्शिदाबाद पहुंचे. वे हजारदुआरी एक्सप्रेस से रानाघाट से ब्रह्मपुर पहुंचे. उनके साथ जियागंज सुरेंद्रनारायण बालिका उच्च विद्यालय की शिक्षिका चंद्राणी हल्दर भी उसी कोच में थीं. पहले सीटों को लेकर बातचीत शुरू हुई. फिर बातचीत में स्कूल का मुद्दा उठा. राज्यपाल टीचर के निमंत्रण पर स्कूल पहुंचे. राज्यपाल सीवी आनंद बोस के मंगलवार दोपहर जियागंज के स्कूल पहुंचने पर छात्र व अन्य सभी कर्मचारी काफी उत्साहित दिखे. शिक्षकों ने उनका स्वागत किया. बच्चों से मिलकर वह काफी खुश हुए. उन्होंने स्कूल को दस हजार रुपये भी भेंट किये. स्कूल की हर शिक्षिका राज्यपाल के व्यवहार से अभिभूत हो गयीं. शिक्षिका चंद्राणी हलदर ने कहा, “मैं कोलकाता स्टेशन से ट्रेन में चढ़ी थी. मैं उनकी सह-यात्री थी. उनके सहयोग से मैं बहुत प्रभावित हुई. सभी मुझे थोड़ा दूर बैठने के लिए कह रहे थे. तभी उन्होंने कहा, नहीं, यह उनकी सीट है. तभी मुझे पता चला कि वह राज्यपाल हैं और जियागंज से आ रहे हैं. मैंने उनसे एक बार स्कूल आने का आग्रह किया. वे मान गये और स्कूल आकर सबसे मुलाकात की.”

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Sandip Tiwari

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