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अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में भी होगा आयुर्वेदिक उपचार

Updated at : 12 Jul 2025 1:43 AM (IST)
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अब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में भी होगा आयुर्वेदिक उपचार

राज्य के 450 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) पर अब मरीज आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ ले सकेंगे.

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राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया निर्देश

संवाददाता, कोलकाता

राज्य के 450 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) पर अब मरीज आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ ले सकेंगे. इन स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज करने वाले मरीजों के लिए अब एलोपैथी के साथ आयुर्वेद का भी विकल्प उपलब्ध होगा. इस संबंध में राज्य के स्वास्थ्य सेवा निदेशक द्वारा नौ जुलाई को आदेश जारी किया गया. स्वास्थ्य विभाग के इस नये आदेश से राज्य के आयुर्वेदिक चिकित्सक भी प्रसन्न हैं, क्योंकि राज्य के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक अपनी चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे थे. आमतौर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में बैठने वाले आयुर्वेद चिकित्सकों को राज्य स्वास्थ्य विभाग के टेलीमेडिसिन (स्वास्थ्य इंगिद) में सहयोग करते हैं. ऐसे चिकित्सक वेलनेस सेंटर में बैठ कर टेलीमेडिसिन के जरिये दूसरे मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक से संपर्क करते हैं और वरिष्ठ व विशेषज्ञ चिकित्सक के सहयोग पर मरीज का इलाज करते हैं. पर वे अपनी चिकित्सा पद्धति से किसी मरीज का इलाज नहीं कर पाते थे. उन्हें बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे में नेशनल हेल्थ मिशन के अपर सचिव और मिशन डायरेक्टर द्वारा 26 जुलाई, 2023 को जारी किये गये निर्देश के बावजूद आयुर्वेदिक दवाइयां लिखने की अनुमति नहीं दी गयी थी. राज्य के 450 स्वास्थ्य केंद्रों का प्रबंधन बीएएमएस उत्तीर्ण आयुर्वेदिक डॉक्टरों के हाथों में है, पर आयुर्वेद से वे मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ स्वपन सोरेन ने नेशनल हेल्थ मिशन (एनएमसी) के उक्त निर्देश का पालन करते हुए यह अनुमति प्रदान की. उन्होंने उक्त आदेश में यह उल्लेख किया है कि अब इलाज के लिए उक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले मरीज अपनी इच्छा से एलोपैथी या आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ ले सकेंगे. दो साल की लंबी कानूनी और प्रशासनिक खींचतान के बाद आखिरकार आयुर्वेदिक डॉक्टरों को इस अधिकार के मिलने वे काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं. राज्य के करीब 450 स्वास्थ्य केंद्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं मुहैया करायी जायेंगी. इस नये निर्देश के बाद दूरदराज के गांवों में भी मरीजों को आयुर्वेदिक इलाज मिल सकेगा. स्वास्थ्य केंद्रों में आयुर्वेदिक इलाज को शामिल करने को लेकर राज्य सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच तनातनी 2023 से शुरू हुई थी. 2022-23 में केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने राज्यों के साथ चर्चा शुरू की थी, ताकि आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी यानी आयुष चिकित्सा पद्धतियों को देश भर के स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल किया जा सके. अब राज्य में आयुष चिकित्सकों को क्रॉसपैथी करने की अनुमति दी गयी है. इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी दी गयी है, इसलिए राज्य के उक्त स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत चिकित्सक एलोपैथी से मरीजों का इलाज कर पा रहे थे. इन्हें एलोपैथ से गैर-संचारी रोग (नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज) जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, लाइफ स्टाइल डिजीज जैसी बीमारियों का इलाज करने का अधिकार प्राप्त है. पर इन चिकित्सकों को अपनी ही पैथी से किसी मरीज का इलाज करने का अधिकारी नहीं था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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