संविदा कर्मचारियों के भरोसे ज्यादातर सरकारी विभाग

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Sep 2024 8:53 PM

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा : पुलिस में भी ठेका के आधार पर हो रहीं नियुक्तियां, पूरे देश में ऐसा सिस्टम कहीं नहीं

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा : पुलिस में भी ठेका के आधार पर हो रहीं नियुक्तियां, पूरे देश में ऐसा सिस्टम कहीं नहीं हाइकोर्ट ने जिला अदालतों में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति के विज्ञप्ति को किया रद्द कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में लगातार अनुबंध के आधार पर की गयीं नियुक्तियों पर सवाल उठाया है. मंगलवार को हाइकोर्ट में ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी विभागों में अनुबंध के आधार पर कार्य करनेवाले कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है. राज्य सरकार ने स्थायी कर्मचारियों की नियुक्तियां जैसे बंद ही कर दी है. राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभाग भी ठेका कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं. यहां तक कि पुलिस में भी ठेका या अनुबंध पर कर्मचारियों की नियुक्ति हो रही है. राज्य सरकार की ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति पर कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम व न्यायाधीश राजर्षि भारद्वाज ने सवाल उठाते हुए इसकी आलोचना की है. मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान, हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायाधीश राजर्षि भारद्वाज की डिविजन बेंच ने कहा कि राज्यभर में संविदा कर्मचारियों के माध्यम से काम हो रहा है. विशेष परिस्थितियों में संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकती है, लेकिन इसे नियमित रूप से नहीं किया जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि यहां तो पुलिस भी अनुबंध पर नियुक्त होती है. देश के अन्य किसी हिस्से में ऐसा नहीं होता. राज्य सरकार ने इस साल मार्च में उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों में अदालत के कर्मचारियों की अनुबंध के आधार पर नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी की थी. इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. न्यायमूर्ति अरिंदम मुखर्जी की एकल पीठ ने इस नियुक्ति पर रोक लगा दी थी. राज्य ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डिविजन बेंच का रुख किया. मंगलवार को, अनुबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित इस मामले की सुनवाई के दौरान डिविजन बेंच ने राज्य सरकार की आलोचना की और उनकी याचिका को खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि एकल पीठ द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया पर जारी की गयी रोक फिलहाल जारी रहेगी. सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने राज्य से सवाल किया, सर्वत्र कैसे अनुबंध के आधार पर कर्मचारी नियुक्त किये जा सकते हैं ? मैंने ऐसा और कहीं नहीं देखा. उन्होंने यह भी सवाल उठाया, अगर कर्मचारियों की नियुक्ति अनुबंध पर होगी, तो क्या वे जिम्मेदार होंगे? अगर अदालत के कर्मचारी अनुबंध पर होंगे, और कोई फाइल खो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सिविक वॉलंटियर की नियुक्ति पर भी उठाये सवाल मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने सिविक वॉलंटियर की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाये. इस संदर्भ में, मुख्य न्यायाधीश ने कहा : जो लोग तीन-चार घंटे के लिए काम करते हैं, उन्हें तो अनुबंध पर नियुक्त किया जा सकता है. लेकिन सभी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से कैसे नियुक्त किया जा रहा है? कोर्ट को यह समझ में नहीं आ रहा है. यहां पुलिसकर्मी भी अनुबंध के आधार पर नियुक्त किये जाते हैं. क्या उन्हें सुबह से काम करा कर 14 हजार रुपये वेतन देने के लिए नियुक्त किया जाता है? मैंने देश में ऐसा कहीं नहीं देखा. इसके बाद, डिविजन बेंच ने राज्य की याचिका को खारिज कर दिया.

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