एचएस में विद्यार्थियों को दी जायेगी जीवन रक्षक ट्रेनिंग

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एचएस में विद्यार्थियों को दी जायेगी जीवन रक्षक ट्रेनिंग

उच्च माध्यमिक छात्रों के लिए एचएस काउंसिल ने एक नयी पहल शुरू की है. अब हायर सेकेंडरी के सिलेबस में कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) और अन्य जान बचाने वालीं तकनीकों के लेसन शामिल किये जा रहे हैं.

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संवाददाता, कोलकाता

उच्च माध्यमिक छात्रों के लिए एचएस काउंसिल ने एक नयी पहल शुरू की है. अब हायर सेकेंडरी के सिलेबस में कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) और अन्य जान बचाने वालीं तकनीकों के लेसन शामिल किये जा रहे हैं. इस पहल के तहत छात्रों को दोनों हाथों का इस्तेमाल करके प्रति मिनट लगभग 100 बार छाती पर दबाव देने की तकनीक सिखायी जायीगी. जरूरत पड़ने पर नाक बंद कर मुंह से सांस देने की (माउथ-टू-माउथ) विधि भी पढ़ाई जायीगी.

काउंसिल के सूत्रों का कहना है कि अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में सीपीआर ही सबसे प्रभावी तात्कालिक उपाय होता है. हालांकि अक्सर थ्योरी और प्रैक्टिकल में बड़ा अंतर पाया जाता है, इसलिए केवल किताबों के माध्यम से नहीं, बल्कि अभ्यास के साथ–साथ ये कौशल विद्यार्थियों को सिखाये जायेंगे. शिक्षक बताते हैं कि कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने वर्कशॉप में सीखा सीपीआर तकनीक अपनाकर जीवन बचाये हैं. नयी पढ़ाई में शामिल प्रमुख बि���दु होंगे:

सीपीआर का विस्तृत प्रैक्टिकल प्रशिक्षण, जिसमें छाती पुश (दोनों हाथों से) और रिदम में दबाव देना शामिल है, जरूरत पड़ने पर नाक बंद कर मुंह से सांस देने की विधि, किसी के एयरवे में रुका हुआ भोजन या पानी कैसे निकालें और पानी में डूबे व्यक्ति की धड़कन को सक्रिय कैसे रखें, हीमलिच मैनूवर की ट्रेनिंग, जिससे सांस न लेने पर फंसा खाना निकाला जा सके

सिलेबस कमेटी ने बताया कि सीपीआर का बेसिक कॉन्सेप्ट पहले से ही कक्षा आठ में मौजूद है, पर उसे प्रभावी ढंग से लागू कर पाने की क्षमता कम उम्र के छात्रों के लिए कठिन होती है, इसलिए यह प्रशिक्षण हायर सेकेंडरी स्तर पर विस्तृत रूप में दिया जा रहा है. पाठ्यक्रम के अनुसार, यदि कोई बेहोश व्यक्ति मिलता है, तो सबसे पहले गर्दन के पास कैरोटिड पल्स की जांच कर देखना चाहिए कि दिल की धड़कन चल रही है या नहीं. यदि धड़कन है, तो हल्का-सा झटका देकर होश में लाने की कोशिश की जा सकती है. यदि आवश्यक हो, तो पीड़ित को करवट देकर मुंह में फंसी किसी भी वस्तु को तुरंत हटाया जाना चाहिए.

छात्रों की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए ये लेसन प्रशिक्षण-आधारित तरीके से पढ़ाये जायेंगे. हायर सेकेंडरी स्कूलों में यह प्रशिक्षण न केवल छात्रों को आपात स्थितियों में आत्मनिर्भर बनायेगा, बल्कि समुदाय में भी जीवन रक्षा की क्षमता बढ़ाने में सहायक होगा.

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Akhilesh Kumar Singh

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