वकील कौस्तव बागची को हाइकोर्ट से राहत नहीं

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 05 Nov 2025 1:58 AM

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हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुख्यमंत्री जब अपने आधिकारिक कक्ष (चैंबर) में मौजूद होती हैं, तो माना जाता है कि वह राज्य के संवैधानिक पद पर रहते हुए आधिकारिक दायित्व निभा रही हैं.

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कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट ने वकील और भाजपा नेता कौस्तव बागची को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया है. बागची पर आरोप है कि उन्होंने एक पुस्तक के अंश ऑनलाइन अपलोड किये थे, जिनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ विवादित टिप्पणियां की गयी थीं. न्यायमूर्ति अपूर्व सिन्हा राय की एकल पीठ ने बागची की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकारी वकील मुख्यमंत्री के निजी मामलों में शिकायत दर्ज नहीं कर सकते. हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुख्यमंत्री जब अपने आधिकारिक कक्ष (चैंबर) में मौजूद होती हैं, तो माना जाता है कि वह राज्य के संवैधानिक पद पर रहते हुए आधिकारिक दायित्व निभा रही हैं.

ऐसे में उनके कक्ष में किसी भी व्यक्ति के साथ की गयी मुलाकात को आधिकारिक बैठक माना जा सकता है. गौरतलब रहे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े निजी जीवन के विवरणों को सार्वजनिक करने के आरोप में निचली अदालत ने बागची को समन जारी किया था. इसी आदेश को चुनौती देते हुए बागची ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाइकोर्ट ने अब ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी.

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