कोलकाता.
गंगासागर मेला शुरू होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन तीर्थयात्रियों का कोलकाता में आगमन तेज हो चुका है. एक ओर जहां शहर में तीर्थयात्रियों की भीड़ बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कोलकाता और आसपास के इलाकों में बसों की भारी कमी देखी जा रही है. दोपहर तक सड़कों पर बसें नजर आती हैं, लेकिन शाम ढलते ही बसों की संख्या तेजी से घट जाती है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ठंड और चालक-कंडक्टर की कमी बनी वजह : कोलकाता और आसपास के इलाकों के लोगों का मानना है कि कड़ाके की ठंड के कारण सरकारी और निजी दोनों तरह की बसों की संख्या कम हो रही है. एक बस मालिक ने बताया कि ठंड की वजह से कई ड्राइवर और कंडक्टर शाम के बाद बस चलाने को तैयार नहीं होते, जिससे रूट पर बसें कम हो जाती हैं.अन्य आयोजनों का भी प्रभाव : सिटी सबर्बन बस सर्विसेज के नेता टीटू साहा ने बताया कि पिछले सप्ताह हुगली जिले के पांडुआ में एक धार्मिक कार्यक्रम के लिए कई निजी बसें किराये पर ली गयीं थीं, जिसके कारण शहर में बसों की संख्या कम हो गयी थी. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ बसें वापस लौटी हैं, लेकिन कुल मिलाकर बसों की कमी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं.
एसआइआर व गंगासागर मेले का असर : बस मालिकों के कुछ संगठनों ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को भी बसों की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है. सूत्रों के अनुसार, सामान्य दिनों में कोलकाता और आसपास के इलाकों में औसतन करीब 3,500 बसें यात्रियों को सेवा देती हैं, लेकिन ठंड, गंगासागर मेला और एसआइआर जैसी वजहों से यह संख्या घटकर 2,700 से 2,800 के बीच रह गयी है.10 से 18 जनवरी के बीच हालात और बिगड़ने की आशंका: एक निजी बस मालिक ने आशंका जतायी कि 10 से 18 जनवरी के बीच महानगर में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से गंगासागर मेले की ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में सरकारी और निजी बसों को काकद्वीप और सागर भेजा जायेगा. इससे शहर में आम यात्रियों की परेशानी और बढ़ने की संभावना है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

