45 लाख नकदी सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हुए जब्त
Updated at : 13 Oct 2025 1:15 AM (IST)
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राज्य की नगरपालिकाओं में हुईं नियुक्तियों के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गत शुक्रवार को राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़ी कार्रवाई की थी.
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मंत्री के ठिकानों पर ईडी ने की थी छापेमारी
संवाददाता, कोलकाताराज्य की नगरपालिकाओं में हुईं नियुक्तियों के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गत शुक्रवार को राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़ी कार्रवाई की थी. ईडी की कोलकाता जोनल यूनिट टीम ने कोलकाता व आसपास 13 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था. जिन परिसरों में छापेमारी की गयी थी, उनमें राज्य के अग्निशमन व आपात सेवा विभाग के मंत्री व तृणमूल विधायक सुजीत बोस का कार्यालय और उनके बेटे का रेस्टोरेंट भी शामिल हैं. ईडी ने तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात, डिजिटल उपकरण व करीब 45 लाख रुपये बरामद किये हैं. ईडी इस मामले की जांच सीबीआइ द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कर रही है. यह प्राथमिकी कलकत्ता हाइकोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गयी थी. ईडी ने कलकत्ता हाइकोर्ट में ‘सौमेन नंदी बनाम पश्चिम बंगाल सरकार’ मामले में अपनी जांच रिपोर्ट पहले ही दाखिल की थी. इसमें राज्य के विभिन्न नगर निकायों में नियुक्तियों में की गयी अनियमितताओं का पूरा ब्योरा दिया गया था. ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इसके लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की गयी थी. राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले की जांच में नगरपालिकाओं में हुईं नियुक्तियों में बरती गयी अनियमितता की बात सामने आयी थी. कांचरापाड़ा, न्यू बैरकपुर, कमरहट्टी, टीटागढ़, बरानगर, हालीशहर, दक्षिण दमदम समेत अन्य नगरपालिकाओं में हुईं नियुक्तियां जांच के दायरे में हैं. यहां मजदूर, झाड़ूदार, क्लर्क, चपरासी, एंबुलेंस अटेंडेंट, असिस्टेंट मिस्त्री, पंप ऑपरेटर, हेल्पर, स्वच्छता सहायक व ड्राइवर जैसे पदों पर घूस लेकर नियुक्तियां देने का आरोप है. ईडी के अनुसार, जांच में पाया गया कि इन सभी नगरपालिकाओं की नियुक्ति प्रक्रिया का ठेका एक ही कंपनी एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था. इस कंपनी का निदेशक अयन शील है, पहले ही स्कूलों में हुईं नियुक्तियों के घोटाले में गिरफ्तार हो चुका है. उसकी कंपनी को प्रश्नपत्रों की छपाई, ओएमआर शीट तैयार करने, अंकों के मूल्यांकन और मेरिट लिस्ट तैयार करने का काम दिया गया था. ईडी का आरोप है कि शील ने अपने पद और जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए कुछ राजनीतिक नेताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर एक अपराधी साजिश रची. इसके तहत ओएमआर शीट में हेराफेरी की गयी और धन लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों को नौकरी दी गयी. ईडी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क राज्यभर में फैला था और इसमें कई सार्वजनिक प्रतिनिधियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं. ईडी ने इस मामले में शील के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट विशेष अदालत, कोलकाता में दाखिल की है. इससे पहले भी ईडी ने मंत्री सुजीत बोस और खाद्य व आपूर्ति मंत्री रथिन घोष के आवास और कार्यालयों पर छापेमारी की थी. केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा है कि अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आये हैं, वे बताते हैं कि नियुक्ति घोटाला राज्य के कई नगर निकायों तक फैला हुआ है और इसमें करोड़ों रुपये की अवैध लेन-देन हुई है. ईडी के सूत्रों ने बताया कि जब्त किये गये दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है. भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए ईडी आगे की जांच जारी रहेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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