सिलीगुड़ी में दाेहरे हत्याकांड की जांच पर हाइकोर्ट ने उठाये सवाल

उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी के निकट भक्तिनगर इलाके में एक फ्लैट से मां और बेटी के शव बरामद किये गये थे.
संवाददाता, कोलकाता.
उत्तर बंगाल में सिलीगुड़ी के निकट भक्तिनगर इलाके में एक फ्लैट से मां और बेटी के शव बरामद किये गये थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि मां ने आत्महत्या की थी, जबकि बेटी की हत्या हुई थी. इस घटना को लेकर सिलीगुड़ी सिटी पुलिस की ओर से जमा किये गये रिपोर्ट पर कलकत्ता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने सवाल उठाये हैं. जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति गौरांग कांत की खंडपीठ ने कहा कि इस दोहरे हत्याकांड की पुलिस जांच में बड़ी खामियां हैं.
अदालत ने पुलिस से पूछा कि जब मामले में भू-माफियाओं के खिलाफ आरोप हैं और जिस महिला की हत्या की गयी है उसके पति की भूमिका भी संदिग्ध है, तो पुलिस जांच में इतना लापरवाह रवैया कैसे अपना सकती है? हाइकोर्ट ने सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर को साइबर अपराध सहित विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों को लेकर एसआइटी गठित करने का निर्देश दिया है और कहा है कि मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में जारी रहेगी. इसके साथ ही उन्होंने एसआइटी को प्रत्येक 15 दिनों के अंतराल पर जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
तीन दिसंबर 2023 को सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के भक्तिनगर थाना क्षेत्र में एक आवासीय फ्लैट के दो कमरों में लता सरकार और उनकी बेटी तियासा सरकार का शव बरामद किया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि तियासा की मौत सिर के पिछले हिस्से पर किसी भारी चीज से प्रहार किये जाने पर अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई.
जबकि लता सरकार की मौत जहर खाने की वजह से हुई थी. पुलिस ने लता सरकार के शव के पास से एक सुसाइड नोट बरामद किया था. आरोप है कि कुछ स्थानीय भू-माफिया एक जमीन की खरीद को लेकर उसे और उसके पति (जो पेशे से प्रमोटर हैं) को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं. लता सरकार ने अपने सुसाइड नोट में कहा कि वह इसलिए आत्महत्या कर रही हैं क्योंकि वह माफिया की लगातार धमकियों का दबाव नहीं झेल पा रही है. हालांकि, जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि लता सरकार ने अपनी बेटी तियासा की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली थी. घटना में आरोपी दो प्रमोटरों में से एक को अग्रिम जमानत दे दी गयी. जबकि पुलिस ने एक अन्य प्रमोटर को गिरफ्तार किया था. उक्त प्रमोटर ने जमानत की मांग करते हुए हाइकोर्ट का रुख किया था, हालांकि, उच्च न्यायालय ने प्रमोटर की जमानत याचिका खारिज कर दी.
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