कोलकाता. मकर संक्रांति पर गंगासागर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया. मान्यता है कि त्रेता युग में स्वर्ग से उतरी मां गंगा ने सागर तट स्थित कपिल मुनि के आश्रम के पास राजा सगर के भस्म हुए 60 हजार पुत्रों को इसी शुभ मुहूर्त में मोक्ष प्रदान किया था. तभी से गंगासागर स्नान की परंपरा चली आ रही है. इसी विश्वास के साथ देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब गंगासागर पहुंचा. राज्य सरकार की ओर से मंत्री अरूप विश्वास ने गंगासागर मेला कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एक से 15 जनवरी के बीच करीब एक करोड़ 30 लाख श्रद्धालुओं ने गंगासागर में पुण्य स्नान किया. इस वर्ष मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त 14 जनवरी दोपहर 1.19 बजे से 15 जनवरी गुरुवार अपराह्न 1.19 बजे तक रहा. मंत्री के अनुसार बुधवार अपराह्न तीन बजे तक 85 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे. यानी पिछले 24 घंटे में लगभग 45 लाख लोगों ने गंगासागर में आस्था की डुबकी लगायी. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी के कारण इस वर्ष भी गंगासागर मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. गंगासागर मेले का शुभारंभ आठ जनवरी को हुआ था, जो 17 जनवरी तक चलेगा. हालांकि गुरुवार से भीड़ में कमी आयी है और हजारों श्रद्धालु स्नान के बाद अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राज्य परिवहन विभाग की ओर से हावड़ा और बाबूघाट से लॉट आठ तक 3600 सरकारी और निजी बसों का परिचालन किया गया. कचुबेरिया से गंगासागर तक 300 बसें चलायी गयीं. मुड़ीगंगा नदी पार कराने के लिए 45 बार्ज, 13 वेसल और 120 लांच संचालित की गयीं. बीमार श्रद्धालुओं के लिए तीन वाटर एंबुलेंस और एक एयर एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गयी थी.
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