इस्ट कोस्ट एक्सप्रेस से चार तस्करों को दबोचा गया

Updated at : 16 Jan 2026 1:13 AM (IST)
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इस्ट कोस्ट एक्सप्रेस से चार तस्करों को दबोचा गया

तस्कर इन बच्चों को काम दिलाने के नाम पर सिकंदराबाद और हैदराबाद ले जाने की फिराक में थे.

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पांच बच्चे मुक्त कराये गये, जिन्हें हैदराबाद व सिकंदराबाद ले जाने की फिराक में थे तस्कर

हावड़ा. हैदराबाद जा रही इस्ट कोस्ट एक्सप्रेस में शालीमार आरपीएफ की एस्कॉर्ट टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार बाल तस्करों को गिरफ्तार किया और पांच बच्चों को अपनी हिफाजत में ले लिया. तस्कर इन बच्चों को काम दिलाने के नाम पर सिकंदराबाद और हैदराबाद ले जाने की फिराक में थे. यह कार्रवाई शालीमार आरपीएफ इंस्पेक्टर सुशील कुमार सिंह, एएसआइ एसके भूनिया और कांस्टेबल रिंकी कुमारी के नेतृत्व में की गयी.

मुक्त कराये गये बच्चों में दो बिहार व तीन बंगाल के

गिरफ्तार तस्करों के पास से बरामद पांच बच्चों में से दो बिहार के मधुबनी जिले के हैं, जबकि अन्य तीन पश्चिम बंगाल के नदिया, मुर्शिदाबाद और पूर्व मेदिनीपुर जिले के निवासी हैं. कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तस्करों और बच्चों को खड़गपुर जीआरपी के हवाले कर दिया गया.

जानकारी के अनुसार, इस्ट कोस्ट एक्सप्रेस शालीमार से हैदराबाद के लिए रवाना हुई थी. इसी दौरान एएसआइ एसके भूनिया को सूचना मिली कि कुछ तस्कर बच्चों को लेकर ट्रेन में सवार हुए हैं. इसके बाद आरपीएफ टीम ने ट्रेन के विभिन्न कोच में अभियान चलाया. कोच एस-1, एस-2 और बी-4 की तलाशी के दौरान चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया और पांच बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया.

पूछताछ में बच्चों ने बताया कि तस्कर उन्हें हैदराबाद और सिकंदराबाद ले जा रहे थे, जहां तीन से छह हजार रुपये मासिक वेतन पर काम दिलाने का लालच दिया गया था.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में शालीमार आरपीएफ ने बाल तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है. विभिन्न अभियानों के तहत स्टेशन परिसर और उसके आसपास से सैकड़ों बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराकर उनके परिजनों को सौंपा गया. ऑपरेशन एएचटीयू के तहत 16 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 36 नाबालिगों को सुरक्षित रखा गया. वहीं, ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के अंतर्गत कुल 127 बच्चों, जिनमें 118 लड़के और नौ लड़कियां शामिल हैं, को हिफाजत में लिया गया.

इसके अलावा रेलवे अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 10,559 मामले दर्ज किये गये और दोषियों को दंडित किया गया. बताया गया है कि बिहार और बंगाल से तस्कर पहले बच्चों को हावड़ा स्टेशन और फिर शालीमार स्टेशन लाते हैं, क्योंकि दक्षिण भारत जाने वालीं ज्यादातर ट्रेनें शालीमार स्टेशन से ही खुलती हैं. इसी कारण तस्कर बच्चों को नौकरी का झांसा देकर यहां से दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में भेजने की कोशिश करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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