शेख शाहजहां समेत 25 के खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी
Updated at : 07 Jul 2025 1:05 AM (IST)
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राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के एक और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने शुरू की है.
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सीबीआइ ने शुरू की संदेशखाली में चुनाव बाद हिंसा मामले की जांच
2019 में लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं की हुई हत्या का मामला
संवाददाता, कोलकाताराज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा के एक और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने शुरू की है. मामला उत्तर 24 परगना के संदेशखाली इलाके की है, जहां वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के तीन कार्यकर्ताओं प्रदीप मंडल, देवदास मंडल और सुकांत मंडल की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी. उक्त घटना में कयूम मोल्ला नामक एक शख्स भी घायल हुआ था. अदालत के निर्देश पर सीबीआइ ने आधिकारिक तौर पर इस मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए एक प्राथमिकी दर्ज की है. प्राथमिकी में तृणमूल कांग्रेस का पूर्व नेता शेख शाहजहां समेत 25 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में दर्ज किये गये मामले : सीबीआइ ने अपनी प्राथमिकी में हत्या, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, दंगा करना, हथियारों के साथ हिंसा करना और उसके परिणामस्वरूप मौत, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होना, जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाना, अपहरण, बिना अनुमति के दूसरे के घर में घुसना जैसी तमाम धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. सूत्रों का दावा है कि हाइकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने बशीरहाट कोर्ट और सीआइडी से मामले के सभी दस्तावेज एकत्र किये, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गयी.शेख शाहजहां संदेशखाली में महिलाओं दुष्कर्म, लोगों की जमीनों पर जबरन कब्जे और करोड़ों के राशन वितरण घोटाले के मामले में पिछले साल गिरफ्तार होने के बाद से ही न्यायिक हिरासत में है. उस पर प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के अधिकारियों पर हमले का भी आरोप है.
मृतकों के परिजनों ने की थी सीबीआइ जांच की मांग, कोर्ट ने कहा था : वीभत्स घटना
सीबीआइ को तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जांच के लिए गत 30 जून को कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश जय सेनगुप्ता ने निर्देश दिया था. इसके साथ ही अदालत ने जांच के लिए सीबीआइ को एक विशेष जांच दल गठित करने व जांच की निगरानी केंद्रीय जांच एजेंसी के संयुक्त निदेशक पद के अधिकारी से करने का भी आदेश दिया. अदालत भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की इस घटना को वीभत्स करार दे चुकी है. पहले मामले की जांच नैजात थाने ने शुरू की. बाद में जांच का जिम्मा सीआइडी ने संभाला था. इस दौरान आरोप लगा कि राज्य सरकार के प्रभाव के चलते अब तक इस मामले में कोई प्रगति ही नहीं हो रही थी, जिसके बाद मृतकों के परिजनों ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट का रुख किया था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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