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इमरजेंसी लोकतंत्र के माथे पर कलंक : कार्तिक पाल

Updated at : 23 Jun 2025 1:28 AM (IST)
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इमरजेंसी लोकतंत्र के माथे पर कलंक : कार्तिक पाल

25 जून, वर्ष 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की थी. इमरजेंसी की घोषणा होते ही पूरे देश में हड़कंप मच गया था.

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सीपीआइ (एमएल) नेता को आपातकाल के दौरान किया गया था गिरफ्तार

कुंदन झा, कोलकाता25 जून, वर्ष 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की थी. इमरजेंसी की घोषणा होते ही पूरे देश में हड़कंप मच गया था. विपक्ष के कई नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. आपातकाल को भारतीय राजनीति का ‘काला अध्याय’ भी कहा जाता है. देश में आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. इस दौर में सरकार ने पूरे देश को एक बड़े जेलखाना में बदल दिया था. देश के सभी जेल भरे पड़े थे. पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है.

आपातकाल के दौरान सीपीआइ (एमएल) के नेता कार्तिक पाल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए आजाद भारत के इतिहास में इमरजेंसी को लोकतंत्र का कलंक बताया है. उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार की ज्यादती थी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अचानक इमरजेंसी की घोषणा की थी. जिस समय देश के लोग अपना हक मांग रहे थे, ठीक उसी समय पीएम ने इमरजेंसी लागू करवा दिया. कार्तिक पाल ने कहा कि इमरजेंसी के समय उनकी पार्टी के 5000 कैडरों की हत्या कर दी गयी थी. वर्ष 1976 में उन्हें भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार कर लिया गया. नौ महीने तक उन्हें बंगाल और बिहार के विभिन्न जेलों में रखा गया. उनपर 31 मामले दर्ज किये गये थे. उनके जेल में रहने के दौरान बर्दवान में रह रहे उनके परिवार के लोगों को भी प्रताड़ित किया गया. उनके पिता बटकृष्ण पाल को भी जेल भेज दिया गया. नक्सल आंदोलन को खत्म करने की भरसक कोशिश की गयी थी. किसी बात का प्रतिवाद करने पर ही गिरफ्तार कर लिया जाता था. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के दौरान सबसे घातक कदम मीडिया पर बंदिश लगाना था. उस दौरान कई पत्रकारों को उनकी लेखनी के कारण गिरफ्तार किया गया. संपादकों ने संपादकीय लिखना बंद कर दिया. वे हमेशा खौफ में रहते थे. उन्हें यह डर हमेशा सताता था कि किसी खबर में सरकार के खिलाफ कोई बात नहीं हो जाये, जिससे उन्हें और उनके साथी को गिरफ्तार होना पड़े. मीडिया पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में थी. इस दौर में लोगों का गणतांत्रिक अधिकार छीना गया था. आपातकाल के दौरान बिना किसी अपराध के हजारों लोगों को गिरफ्तार तक जेल में ठूंस दिया गया. इमरजेंसी इस देश का सबसे कलंकित दौर रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AKHILESH KUMAR SINGH

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