ePaper

सात साल से नहीं हुआ है हावड़ा नगर निगम का चुनाव

Updated at : 11 Dec 2025 10:11 PM (IST)
विज्ञापन
सात साल से नहीं हुआ है हावड़ा नगर निगम का चुनाव

बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं हावड़ावासी

विज्ञापन

बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं हावड़ावासी

आजाद भारत के इतिहास में हावड़ा पहला शहर है, जहां निगम का चुनाव सात वर्षों से लंबित है. आखिर चुनाव वर्ष 2013 में हुआ था. ऐसा तब, जब यह शहर राजधानी कोलकाता से भी पुराना है. कोलकाता से सटे होने के कारण 500 साल पुराने इस हावड़ा शहर को जुड़वां शहर भी कहा जाता है. बावजूद इसके इस शहर के लोग पिछले सात वर्षों से निगम की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. निगम का कामकाज संभालने के लिए सरकार की ओर से प्रशासक नियुक्त कर स्थिति को संभालने की कोशिश की गयी. हर छह महीने में प्रशासक बदले गये. वर्ष 2021 में निगम में प्रशासनिक बोर्ड का गठन हुआ. डॉ सुजय चक्रवर्ती के नेतृत्व में एक टीम बनी और निगम की जिम्मेवारी सौंपी गयी. पांच साल तक डॉ चक्रवर्ती और उनकी टीम निगम के कामकाज को सुचारू रखने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन इस वर्ष छठ पूजा के पहले चेयरमैन डॉ चक्रवर्ती और वाइस चेयरमैन सैकत चौधरी ने इस्तीफा दे दिया. बताया जाता है कि पार्टी के एक शीर्ष नेता के कहने पर दोनों ने इस्तीफा दिया था. इसके बाद प्रशासनिक बोर्ड को भंग कर दिया गया. निगम आयुक्त वंदना पोखरीवाल के कंधों पर पूरी जिम्मेवारी दी गयी, लेकिन राज्य में हो रहे एसआइआर के चलते वंदना पोखरीवाल सीईओ कार्यालय का कामकाज संभाल रही हैं. ऐसे में हावड़ा नगर निगम अभी भगवान के भरोसे है. पेश है कुंदन झां की विशेष रिपोर्ट…

10 दिसंबर, 2018 को हावड़ा निगम में बोर्ड की मियाद हुई थी खत्म

10 दिसंबर, 2018 को हावड़ा नगर निगम में बोर्ड की मियाद खत्म हुई. उम्मीद थी कि 2019 के अप्रैल महीने तक निगम चुनाव सरकार करा देगी. पूरा साल बीत गया, लेकिन चुनाव नहीं हुआ. सरकार की ओर निगम आयुक्त बिजन कृष्णा को प्रशासक बनाया गया. वर्ष 2020 में चुनाव होने का संभावना बनी ही थी कि कोविड-19 ने भारत में दस्तक दी और साल 2020 भी बिना चुनाव के बीत गया. 2021 में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गयी. विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस विजयी हुई और राज्य में तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी. सरकार बनने के बाद निगम चुनाव कराने की बारी आयी, लेकिन कई कारणों से चुनाव टलते गया. सात साल बीत गये, लेकिन अभी तक हावड़ा नगर निगम का चुनाव नहीं हुआ है.

29 वर्षों बाद निगम में ढहा था लाल दुर्ग

1984 में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने हावड़ा नगरपालिका को नगर निगम बनाया था. कुल 50 वार्डों को लेकर हावड़ा नगर निगम का सफर शुरू हुआ. आलोक दत्ता दास निगम के पहले मेयर बने. पांच साल बाद बोर्ड का कार्यकाल पूरा हुआ और 1989 में हुए निगम चुनाव में फिर से वाममोर्चा ने जीत हासिल की. निगम में दूसरी बार वाममोर्चा का बोर्ड बना, लेकिन इस बार माकपा के कद्दावर नेता व पूर्व सांसद स्वदेश चक्रवर्ती (दिवंगत) मेयर बने. श्री चक्रवर्ती के नेतृत्व में पांच साल का कार्यकाल पूरा हुआ. तीसरी बार, 1994 में निगम चुनाव में फिर से लाल परचम लहराया और स्वदेश चक्रवर्ती ही दूसरी बार मेयर बने. 1989 में पार्टी ने उन्हें हावड़ा लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वह सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे. इसी बीच, 1999 में निगम चुनाव में फिर से वाममोर्चा ने बाजी मारी और सुविनय घोष मेयर बनकर पहुंचे. लेकिन एक साल बाद ही उनका निधन हो गया. इसके बाद गोपाल मुखर्जी ने मेयर का पदभार संभाला. श्री मुखर्जी का कार्यकाल 2008 में खत्म हुआ. यह वह दौर था, जब राज्य में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी विपक्ष की नेता बनकर उभर रही थीं. वर्ष 2008 के निगम चुनाव में वाममोर्चा फिर से विजयी रही और निगम के इतिहास में पहली बार एक महिला मेयर और डिप्टी मेयर बनीं. ममता जायसवाल मेयर और कावेरी मित्रा डिप्टी मेयर बनायी गयीं.

2013 में बोर्ड की मियाद खत्म हुई. इस समय राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लहर थी. वर्ष 2013 के निगम चुनाव में पहली बार लाल दुर्ग ढहा और तृणमूल कांग्रेस ने बोर्ड का गठन किया. डॉ रथीन चक्रवर्ती को मेयर बनाया गया. पूरे निगम मुख्यालय का कायाकल्प बदल गया. पांच साल के बाद 10 दिसंबर, 2018 को बोर्ड की मियाद खत्म हो गयी.

2015 में बाली नपा का हावड़ा नगर निगम में हुआ विलय

बाली, बेलूड़ और लिलुआ अंचल के लोगों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने बाली नगरपालिका को हावड़ा नगर निगम में विलय कर दिया. यहां के 35 वार्डों का परिसीमन कर 16 वार्ड किये गये. इसके बाद यहां चुनाव हुआ और सभी वार्डों में तृणमूल कांग्रेस विजयी रही. इसके बाद बाली के 16 वार्डों को हावड़ा नगर निगम के 50 वार्डों के साथ जोड़ दिया गया, जिससे वार्डों की संख्या बढ़ कर 66 हो गयी. तीन साल बाद वर्ष 2018, 10 दिसंबर निगम में बोर्ड की मियाद खत्म हो गयी. बाली अंचल के लोगों को निगम की सेवा सिर्फ तीन वर्षों तक ही मिला. बाली अंचल के लोगों को यह विलय पसंद नहीं था, इसलिए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य सरकार ने बाली नगरपालिका को हावड़ा नगर निगम से अलग करने का फैसला लिया. विधानसभा में इसे लेकर बिल भी पारित कर दिया गया, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इस बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से बाली नपा को निगम में जोड़ने और उसे अलग करने को लेकर जवाब मांगा, लेकिन सरकार की ओर से जवाब नहीं मिला. दोनों पक्षों के बीच चली इस तनातनी में निगम का चुनाव टलता चला गया. इन तमाम कानूनी अड़चनों के बावजूद सरकार ने बाली नगरपालिका को अलग कर दिया और हावड़ा नगर निगम में वार्डों की संख्या घट कर 50 हो गयी.

16 वार्डों को परिसीमन के तहत बढ़ाने का लिया गया फैसला

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में 16 वार्डों को परिसीमन के तहत बढ़ाने का फैसला लिया. डीएम के निर्देश पर परिसीमन का काम शुरू हुआ और यहां के आठ वार्डों को तोड़ कर 16 वार्ड करने का निर्णय लिया गया. डीएम कार्यालय में परिसीमन को लेकर सर्वदलीय बैठक हुई थी, जिसमें शामिल विपक्षी दलों के नेताओं ने जिला प्रशासन द्वारा किये गये परिसीमन पर सवाल उठाया और जवाब मांगा. बताया जाता है कि परिसीमन करने का फैसला फाइलों में ही सिमट कर रह गया.

शहर में परेशानियों की फेहरिस्त

बारिश के दिनों बदतर निकासी व्यवस्था, पूरे शहर में सड़कों की बदहाली, गर्मी में पेयजल की किल्लत, जल जमाव, सेवानिवृत कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलना, अस्थायी सफाई कर्मचारियों का काम बंद, ठेकेदारों का करोड़ों रुपये बकाया जैसी मुख्य समस्याओं से लोग परेशान हैं.

करोड़ों रुपये घोटाले का आरोप कलकत्ता हाइकोर्ट में याचिका दायर

हावड़ा नगर निगम में करोड़ों रुपये घोटाला का मामला सामने आया है. इसे लेकर समाजसेवी अमन श्रीवास्तव ने हाइकोर्ट में याचिका भी दायर की है. आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत भेजी गयी राशि का कोई हिसाब निगम के पास नहीं है. यह घोटाला 300 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है.

सभी मेयर के नाम व उनका कार्यकाल

आलोक दत्ता दास 1984-89

स्वदेश चक्रवर्ती 1989-99

सुविनय घोष 1999-2000

गोपाल मुखर्जी 2000-08

ममता जायसवाल 2008-13

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SANDIP TIWARI

लेखक के बारे में

By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola