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नियुक्ति घोटाला : इडी ने मारे ताबड़तोड़ छापे

कार्रवाई. बेलियाघाटा में दो कारोबारी भाइयों के घर की ली गयी तलाशी

डिजिटल उपकरण व दस्तावेज जब्त

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में नगर निकायों में नियुक्ति घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने मंगलवार सुबह कोलकाता के बेलियाघाटा स्थित एक आवासन सहित कम से कम पांच स्थानों पर तलाशी ली. सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान एजेंसी को नियुक्ति प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी कुछ नयी कंपनियों के नाम और वित्तीय लेनदेन के नये सुराग मिले थे. इन्हीं जानकारियों के आधार पर यह ताजा कार्रवाई की गयी.

इस दिन इडी की टीम ने सुबह लगभग सात बजे बेलियाघाटा के हेमचंद्र नस्कर रोड स्थित एक मकान पर छापा मारा. यह मकान विश्वजीत चौधरी और रंजीत चौधरी नाम के दो भाइयों का बताया गया है. दोनों शहर के जाने-माने व्यापारी हैं. बड़े भाई विश्वजीत कपड़ा व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि छोटे भाई रंजीत निर्माण एवं रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं. इडी सूत्रों के अनुसार, दोनों से जुड़ी कंपनियों के कुछ वित्तीय दस्तावेज एजेंसी के संदेह के दायरे में हैं. छापेमारी के दौरान छह अधिकारियों की टीम केंद्रीय बलों की सुरक्षा घेरे में मौके पर पहुंची. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह अधिकारी जब मकान पर पहुंचे, तो गेट बंद था. काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद पास के आवास से एक सुरक्षा कर्मी ने आकर दरवाजा खोला. इसके बाद इडी अधिकारी घर के अंदर दाखिल हुए और तलाशी शुरू की.

सूत्रों ने बताया कि तलाशी के दौरान एजेंसी ने मकान से कुछ डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किये हैं. साथ ही, चौधरी भाइयों के निर्माण समेत अन्य व्यवसाय से जुड़े खातों की भी जांच की जा रही है. रंजीत चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें जांच की वजह के बारे में अभी कुछ नहीं बताया गया है. उनका कहना है, हम दोनों भाई कारोबारी हैं. मेरा 1996 से रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन का काम है. पुरी में दो होटल भी खोले हैं. एजेंसी ने अभी तक हमें कुछ स्पष्ट नहीं बताया है. इडी अधिकारियों ने बताया कि बेलियाघाटा के अलावा कोलकाता के अन्य चार इलाकों में भी एक साथ छापेमारी की गयी. यह कार्रवाई कथित रूप से उन बिचौलियों और कंपनियों की तलाश में की गयी, जो नगर निकाय नियुक्ति प्रक्रिया में सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हुए थे.

इस महीने की शुरुआत में भी इडी ने इस मामले में कार्रवाई की थी. तब एजेंसी ने राज्य के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री सुजीत बोस के सॉल्टलेक स्थित कार्यालय, उनके बेटे के स्वामित्व वाले रेस्तरां और दक्षिण दमदम नगरपालिका के चेयरमैन निताई दत्ता के आवास सहित कई ठिकानों पर छापे मारे थे. उस दौरान इडी ने 45 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त करने का दावा किया था. बोस ने उस समय एजेंसी की कार्रवाई को राजनीतिक बताया था. उन्होंने कहा था: हर बार चुनाव से पहले ये लोग ऐसा करते हैं. घर और दफ्तर दोनों जगह छापे डालते हैं. पहले भी रेड में कुछ नहीं मिला था. यह सब दबाव बनाने की कोशिश है. इडी सूत्रों के अनुसार, पिछली छापेमारी से मिले दस्तावेजों के विश्लेषण में कुछ नये नाम सामने आये हैं, जिनके आधार पर मंगलवार को नयी कार्रवाई की गयी. जांच का मकसद नियुक्ति प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के वित्तीय लेन-देन और संबंधित कंपनियों के नेटवर्क को खंगालना है. इडी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी को नयी गिरफ्तारी नहीं की गयी है, लेकिन तलाशी में जब्त किये गये कागजात और उपकरणों के विश्लेषण के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी.

नगर निकाय नियुक्ति घोटाले में चल रही है जांच

जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि नगर निकाय नियुक्ति घोटाले की जांच कई महीनों से चल रही है. शिक्षक नियुक्ति घोटाले में गिरफ्तार प्रमोटर व कारोबारी अयन शील के ठिकाने से मिले दस्तावेज के जरिये नगर निकायों में नियुक्तियों के घोटाले का पता चला था. जांच में मिले तथ्यों के आधार पर ही इडी अब कथित ‘लिंकमैन’ और वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है.

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