शॉर्ट एंड डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को भी मिल रहे काफी दर्शक
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 10 Dec 2024 1:37 AM
बच्ची थी तो मुझे वेंट्रिलोक्विस्ट शब्द के बारे में नहीं पता था. माइकल मेरा बचपन का दोस्त था और अब वह 50 साल का है.
कम्पीटिशन ऑन इंडियन डॉक्यूमेंट्री फिल्म्स श्रेणी में ‘मी एंड माइकल’ और ‘वर्लपूल’ फिल्म की स्क्रीनिंग की गयी
भारती जैनानी, कोलकाता.
कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सभी तय सिनेमा घरों में दर्शकों की अच्छी भीड़ जुट रही है. विशेषकर रवींद्र सदन, शिशिर मंच और नंदन परिसर के तीनों हॉल में शॉर्ट एंड डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को देखने के लिए भी सिने प्रेमियों की अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही है. सोमवार को “शॉर्ट एंड डॉक्यूमेंट्री: कम्पीटिशन ऑन इंडियन डॉक्यूमेंट्री फिल्म” की श्रेणी में ‘मी एंड माइकल’ और ‘वर्लपूल’ फिल्म की स्क्रीनिगं की गयी, जिसे देखने के लिए काफी लोग जुटे. इन दोनों फिल्मों के स्टार्स ने यहां संवाददाता सम्मेलन में फिल्म के बारे में जानकारी दी. ‘मी एंड माइकल’ की निर्देशक व प्रोड्यूसर जयश्री मुखर्जी ने बताया कि मी एंड माइकल एक डॉक्यूमेंट्री है जो कोलकाता के वेंट्रिलोक्विस्ट प्रबीर कुमार दास की वास्तविक जीवन की कहानी बताती है. उनका अपनी वेंट्रिलोक्विज़म डॉल माइकल के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है.वेंट्रिलोक्विज़म हममें से कई लोगों के बचपन का एक बड़ा हिस्सा रहा है. मैं यह देखकर आश्चर्यचकित रह गयी कि गुड़िया दर्शकों से किस तरह बात कर सकती है. जब मैं बड़ी हुई तो मुझे इसके बारे में विस्तार से पता चला. बच्ची थी तो मुझे वेंट्रिलोक्विस्ट शब्द के बारे में नहीं पता था. माइकल मेरा बचपन का दोस्त था और अब वह 50 साल का है. वेंट्रिलोक्विज़म के प्रति इसी जुनून ने मुझे यह फिल्म करने के लिए प्रेरित किया. फिल्म का संगीत पंडित शुभोजीत मजूमदार और पं. कल्याण मजूमदार ने तैयार किया है. फिल्म के कलाकारों में प्रबीर कुमार दास (वेंट्रिलोक्विस्ट) के रोल में हैं. मी एंड और माइकल और व्हर्लपूल दोनों फिल्में अद्भुत कहानियों का दावा करती हैं और इसे दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया.
शॉर्ट फिल्म व्हर्लपूल की डाइरेक्टर दीप्थी निर्मला ने कहा फिल्म फेस्टिवल में मेरी फिल्म का शामिल होना, मेरे लिए बहुत खुशी की बात है. यह मेरी पहली फिल्म है, लेकिन काफी अच्छा सपोर्ट व दर्शकों का प्यार मिला है. वह कहती है कि व्हर्लपूल एक ऐसी महिला के बारे में कहानी है जो भावनात्मक भंवर में फंस जाती है. उसका जीवन तब उथल-पुथल हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उसका पति शायद वैसा नहीं है जैसा उसने सोचा था. फिल्म के निर्माता जेम्स जैकब हैं. फिल्म का संगीत शफीक रहमान और डेंसन डोमिनिक ने तैयार किया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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