धर्मतला में निकाली रैली, राज्य व केंद्र सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
मांगें न माने जाने पर और व्यापक आंदोलन की दी चेतावनी
कोलकाता. फर्जी ट्राइबल प्रमाण पत्रों को रद्द करने और इसकी जांच के लिए आयोग गठित करने की मांग को लेकर मंगलवार को आदिवासी संगठनों के एक समूह ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑल ट्राइबल ऑर्गेनाइजेशंस के आह्वान पर प्रदर्शनकारी हावड़ा और सियालदह स्टेशन से मार्च करते हुए धर्मतला स्थित रानी रासमणि रोड पहुंचे. करीब 50 आदिवासी संगठनों के इस संयुक्त मंच के नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस की राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की नीतियों पर भी कड़ा हमला बोला. नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गयीं, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान बड़े आंदोलन पर उतरेंगे. रैली को रामदास किस्कू, तपन सरदार, परशाल मुर्मू, राबिन सोरेन, दुलाल मुड़ी, सदानंद मुरा, बुबुन मुरा, असीम सिंह और मदन मुर्मू सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ऐसे कई लोगों को ट्राइबल प्रमाण पत्र जारी कर रही है, जो वास्तव में आदिवासी नहीं हैं. इससे असली आदिवासी समुदाय के लोग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं. आंदोलनकारियों ने वर्ष 2006 के फॉरेस्ट लैंड राइट्स एक्ट को पूर्ण रूप से लागू करने और 2023 के फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट को रद्द करने की भी मांग की. नेताओं का आरोप था कि नया कानून आदिवासियों के अधिकारों को कमजोर करता है और बड़े पूंजीपतियों के हितों को साधने के लिए लाया गया है.
नेताओं ने बताया कि राज्य सरकार को एक मांग पत्र सौंपा गया है. इसमें फर्जी ट्राइबल प्रमाण पत्रों को रद्द करने, जांच आयोग के गठन, रैयत और पट्टे के तहत आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जा समाप्त करने, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजी-रोटी के अधिकार सुनिश्चित करने तथा फॉरेस्ट राइट्स एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग शामिल है.
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