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कच्चे जूट संकट पर आपात स्थिति घोषित करने की मांग

बैठक में बताया गया कि चालू जूट वर्ष में कुल कच्चे जूट का उत्पादन करीब 60 लाख गांठ आंका गया है,

त्रिपक्षीय बैठक में केंद्र-राज्य सरकार से हस्तक्षेप की अपील

कोलकाता. राज्य के जूट उद्योग में कच्चे जूट की भारी किल्लत को लेकर बुधवार को हुई त्रिपक्षीय बैठक में राज्य सरकार, जूट मिल मालिकों और श्रमिक संगठनों ने स्थिति को असाधारण आपातकाल करार दिया. राज्य के श्रम मंत्री मलय घटक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में श्रम विभाग के आयुक्त, जूट आयुक्त कार्यालय के अधिकारी, इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन और सभी प्रमुख ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

बैठक में बताया गया कि चालू जूट वर्ष में कुल कच्चे जूट का उत्पादन करीब 60 लाख गांठ आंका गया है, जिसमें से दिसंबर 2025 तक लगभग 30 लाख गांठ की मार्केटिंग हो चुकी है. शेष 30 लाख गांठ सामान्य परिस्थितियों में उद्योग को उपलब्ध होनी चाहिए थी, लेकिन बाजार में इसकी आवक नहीं होने से मिलों का संचालन गंभीर संकट में पड़ गया है.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बैठक में कच्चे जूट की उपलब्धता को औपचारिक रूप से आपात स्थिति घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया. इसके साथ ही निजी कच्चे जूट व्यापार पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने और आपात अवधि में इसे अवैध घोषित करने की मांग की गयी. जब्त और नियंत्रित जूट का प्रबंधन भारतीय पटसन निगम के माध्यम से करने का भी सुझाव दिया गया. सभी पक्षों ने कहा कि कीमतों पर नियंत्रण, कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति और सरकारी पैकेजिंग दायित्वों को निभाने के लिए ऐसे असाधारण कदम जरूरी हैं.

क्या कहना है बीएमएस नेता बिनोद सिंह का ः बैठक के बाद भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ नेता बिनोद सिंह ने कहा कि मिलों में कच्चे जूट का स्टॉक दशकों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे उत्पादन घट रहा है और मजदूरों के कार्य दिवस कम हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और ट्रेड यूनियनों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल जल्द ही नयी दिल्ली जाकर केंद्रीय वस्त्र मंत्री से मुलाकात करेगा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग करेगा. साथ ही राज्य सरकार ले ऑफ मुआवजा और क्षतिपूर्ति को लेकर भी एडवाइजरी जारी करेगी. बिनोद सिंह ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने जमाखोरों पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं की, तो और जूट मिलें बंद होंगी और मजदूर बेरोजगारी व भुखमरी की ओर धकेल दिये जायेंगे.

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