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नियुक्ति घोटाला : सीबीआइ ने कोर्ट से की प्रशांत सूर को पक्षद्रोही गवाह घोषित करने की अपील

Updated at : 21 Sep 2025 11:11 PM (IST)
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नियुक्ति घोटाला : सीबीआइ ने कोर्ट से की प्रशांत सूर को पक्षद्रोही गवाह घोषित करने की अपील

राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में डब्ल्यूबीएसएससी के जरिये हुईं नियुक्तियों के घोटाले में गवाही दर्ज करने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने यहां स्पेशल सीबीआइ कोर्ट से एक गवाह को पक्षद्रोही गवाह घोषित करने की अपील की है.

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कोलकाता. राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में डब्ल्यूबीएसएससी के जरिये हुईं नियुक्तियों के घोटाले में गवाही दर्ज करने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने यहां स्पेशल सीबीआइ कोर्ट से एक गवाह को पक्षद्रोही गवाह घोषित करने की अपील की है. गवाह का नाम प्रशांत सूर है, जो डब्ल्यूबीएसएससी के पूर्व चेयरमैन हैं. अदालत सूत्रों के मुताबिक, सूर ने जो बयान सीबीआइ को दिया था, उसके कुछ हिस्सों से केंद्रीय एजेंसी सहमत नहीं है. इसी कारण सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने न्यायाधीश के समक्ष उन्हें पक्षद्रोही गवाह घोषित करने का अनुरोध किया. क्या है पक्षद्रोही गवाह : मुकदमे के दौरान, अदालत में जब प्रॉसीक्यूशन काउंसिल किसी व्यक्ति को अपने पक्ष में गवाही देने के लिए बुलाती है और वह व्यक्ति बुलाये जाने पर जांच के दौरान एकत्र किये गये अपने बयान की पुष्टि नहीं करता है या पक्ष विपरीत बयान देता है, तब उसे पक्षद्रोही गवाह कहा जाता है. गौरतलब है कि डब्ल्यूबीएसएससी के जरिये हुईं नियुक्तियों के घोटाले से जुड़ीं कई याचिकाएं अब भी अदालत में लंबित हैं. सीबीआइ के मुताबिक इस घोटाले के ‘किंगपिन’ माने जाने वाले राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी अब तक जेल से बाहर नहीं आ पाये हैं. हालांकि नियुक्तियों के कुछ मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन अन्य मामले लंबित रहने के कारण वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. वर्तमान में डब्ल्यूबीएसएससी के जरिये नौवीं-10वीं, 11वीं-12वीं कक्षाओं में शिक्षकों और ग्रुप सी के पदों में हुईं नियुक्तियों से जुड़े घोटाले तीन मामलों की एक साथ सुनवाई चल रही है. इससे पहले ही अदालत ने चटर्जी समेत कुछ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिये थे. गत शनिवार को इन्हीं मामलों की गवाही चल रही थी, तभी सीबीआइ ने सूर को पक्षद्रोही गवाह घोषित करने की अपील की. गौरतलब है कि वर्ष 2022 में पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी हुई थी. उनके साथ उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी का नाम भी घोटाले में सामने आया था. अर्पिता के घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANDIP TIWARI

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By SANDIP TIWARI

SANDIP TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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