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महामारी बनता जा रहा है कैंसर

Updated at : 07 Nov 2025 2:22 AM (IST)
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महामारी बनता जा रहा है कैंसर

कैंसर पूरे देश के लिए खतरा बनाता जा रहा है. इन दिनों ओरल कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं.

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बंगाल के लिए भी खतरे की घंटी

शिव कुमार राउत, कोलकाता

कैंसर पूरे देश के लिए खतरा बनाता जा रहा है. इन दिनों ओरल कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं. अगर पश्चिम बंगाल की बात करें तो यह राज्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है. ऐसे में कैंसर के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूकता के लिए राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 7 नवंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना है, यह दिन लोगों को कैंसर के लक्षणों, इसके उपचार और रोकथाम के तरीकों के बारे में जानकारी देने के लिए समर्पित है. कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते पहचान हो जाये तो इसका इलाज संभव है, इस दिन के माध्यम से हम कैंसर के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 7 नवंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना है, यह दिन लोगों को कैंसर के लक्षणों, इसके उपचार और रोकथाम के तरीकों के बारे में जानकारी देने के लिए समर्पित है, कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है, इस दिन के माध्यम से हम कैंसर के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और इसके खिलाफ लड़ाई को मजबूत बना सकते हैं.

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस क्यों मनाया जाता है?

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 7 नवंबर को मनाया जाता है ताकि लोग कैंसर के लक्षण, उसके कारणों और उपचार के बारे में जागरूक हों. इसका उद्देश्य कैंसर के प्रति डर को कम करना और लोगों को समय पर जांच कराये जाने के लिए प्रेरित करना है, यह दिन समाज में कैंसर से बचाव के उपायों के बारे में शिक्षा देने का एक माध्यम बनता है. गौरतलब है कि यह दिन नोबेल पुरस्कार विजेता मैडम क्यूरी की जयंती का प्रतीक है. 2014 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा शुरू किये गये इस दिवस का मुख्य उद्देश्य कैंसर के बढ़ते बोझ के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. यह जागरूकता महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में सालाना 1.3 मिलियन से अधिक नये कैंसर मामलों का निदान किया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता पहला कदम है. जागरूकता की कमी जोखिम बन सकता है. कैंसर के मामलों में अक्सर देर से पहचान की जाती है, जो मौत का बड़ा कारक है. शीघ्र पता लगाना और समय पर इलाज शुरु होने से मरीज की जान बचायी जा सकती है.

राज्य में किस-किस कैंसर के लोग हो रहे शिकार

पुरुषों में फेफड़े और मुंह के कैंसर के अधिक मामले सामने आते हैं. आईसीएमआर की रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पुरुषों में फेफड़े व मुंह, जीभ, प्रोस्टेट और गले के कैंसर के मामले सर्वाधिक पाये जाते हैं. इन सभी कैंसरों में फेफड़ों का कैंसर सबसे प्रमुख है. राज्य के नये मामलों में अनुमानित 25 प्रतिशत पुरुष फेफड़े के कैंसर से पीड़ित होंगे. कोलकाता कैंसर रजिस्ट्री ने चिंताजनक यह डेटा प्रस्तुत किया है. जिसमें बताया गया है कि भारत में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की उच्चतम घटना दर कोलकाता से रिपोर्ट की गयी है. तंबाकू की वजह से पुरुष फेफड़ों और मुंह के कैंसर के शिकार हो रहे हैं. राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 41 प्रतिशत पुरुषों में कैंसर का कारण तंबाकू का सेवन है. इसके अलावा महानगरीय क्षेत्रों में फेफड़ों के कैंसर के लिए वायु प्रदूषण और व्यावसायिक जोखिम जैसे कारक भी योगदान करते हैं. यह दर्शाता है कि कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में तंबाकू नियंत्रण और वायु गुणवत्ता नियंत्रण दोनों को मजबूत करने की आवश्यकता है. वहीं महिलाएं में स्तन, पित्ताशय और गर्भाशय कैंसर के शीर्ष मामले सामने आ रहे हैं. स्तन कैंसर अब राज्य की महिलाओं के लिए प्राथमिक चुनौती बन गया है. नये मामलों में लगभग 24.8 प्रतिशत महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित हैं. हाल के अध्ययनों में स्तन कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि का रुझान देखा गया है. स्तन कैंसर की बढ़ती व्यापकता का संबंध बदलती जीवनशैली से है. गर्भधारण में देरी. स्तनपान कम करवाना, बढ़ता तनाव. मोटापा. और जागरूकता की कमी या इलाज में देरी जैसे कारक इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को नियमित स्तन स्व-परीक्षण और 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी करवानी चाहिए. ताकि रोग का पता शुरुआती चरणों में चल सके.

शीर्ष में बंगाल भी शामिल

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कैंसर के कुल संख्या के मामले में पश्चिम बंगाल देश के शीर्ष तीन राज्यों में से एक बन गया है. यह स्थिति राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है. रोकथाम के लिए जीवनशैली में बदलाव सह पर्यावरणीय कारकों पर भी तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है.

क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी

कैंसर की चिकित्सा के लिए कोलकाता और नार्थ बंगाल में विशेष अस्पताल तैयार किया जा रहा है. कोलकाता के एसएसकेएम (पीजी) और उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित नार्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज में अलग से अस्पताल तैयार किया जा रहा है. अगले साल यह दोनों ही अस्पताल आम लोगों को सौंप दिया जायेगा. जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार के कैंसर का इलाज किया जायेगा. इसके अलावा फिलहाल पीजी , कोलकाता मेडिकल कॉलेज , एनआरएस मेडिकल कॉलेज, आरजीकर मेडिकल कॉलेज में कैंसर की इलाज हो रही है. वहीं मुंह के कैसर की पहचना के लिए डॉ आर अहमद डेंटल मेडिकल कॉलेज एक बेहतर संस्थान हैं. उक्त दोनों अस्पतालों के खुलने से आने वाले दिनों में कैंसर के मरीजों को राहत मिलेगी. वहीं, राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित ‘स्वास्थ्य साथी’ कैंसर रोगियों के लिए कैशलेस उपचार प्रदान करता है. जो कैंसर की पहचान, इलाज और अस्पताल में भर्ती होने की लागत को कवर करती है.

नारायण स्वरूप निगम,

प्रधान सचिव स्वास्थ्य विभाग

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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