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बंगाल: प्रशांत बर्मन को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने राजगंज के बीडीओ को सरेंडर करने को कहा

Updated at : 19 Jan 2026 1:44 PM (IST)
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बंगाल: प्रशांत बर्मन को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने राजगंज के बीडीओ को सरेंडर करने को कहा

Bengal News: इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने भी प्रशांत बर्मन को 22 दिसंबर को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था. उन्हें 72 घंटे के भीतर आत्मसमर्पण करना था, लेकिन वो सुप्रीम कोर्ट चले गये.

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Bengal News: कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट ने राजगंज के बीडीओ प्रशांत बर्मन को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया है. उन पर सॉल्ट लेक के दत्ताबाद में सुनार स्वप्न कामिलिया के अपहरण और हत्या का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने उन्हें उस मामले में सरेंडर करने का आदेश दिया. उन्हें अगले शुक्रवार, 23 जनवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है. उन्हें स्थानीय अदालत में सरेंडर करने को कहा गया है, जहां मामला लंबित है.

कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश बरकरार

इससे पहले, कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने 22 दिसंबर को प्रशांत बर्मन को इस मामले में सरेंडर करने का आदेश दिया था. उन्हें 72 घंटों के भीतर सरेंडर करना था. सरेंडर करने के बाद, वह जमानत के लिए आवेदन कर सकते थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. वो इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गये. दिसंबर में बिधाननगर अदालत ने प्रशांत बर्मन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया.

न्यू टाउन में बरामद हुआ था शव

स्वप्नन कामिल्या का शव 29 अक्टूबर को न्यू टाउन के जतरागाची से बरामद किया गया था. वह पेशे से सुनार थीं. उसके परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. इस घटना में बीडीओ प्रशांत बर्मन का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है. परिवार के लोगों का दावा है कि वही अपने दल के साथ स्वपन के घर पहुंचा था. प्रशांत नीली बत्ती वाली कार में स्वपन के घर आया और उसे घर से ले गया.

पुलिस चाहती है रिमांड

इस मामले की जांच कर रही बंगाल पुलिस का कहना है कि राजगंज के बीडीओ को पूछताछ के लिए हिरासत में लेना आवश्यक है. बिधाननगर पुलिस ने जांच के लिए प्रशांत को कस्टडी में लेने के लिए अदालत में अर्जी दी, लेकिन जब प्रशांत पेश नहीं हुआ, तो अदालत ने उसे सरेंडर करने का आदेश दिया, लेकिन प्रशांत ने उस आदेश को भी नहीं माना. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, लेकिन राजगंज के बीडीओ भी फिलहाल वापस लौट रहे हैं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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