बंगाल चुनाव: सीपीएम और आईएसएफ में नहीं बनी बात, यहां फंस गया गठबंधन का पेंच

Updated at : 13 Feb 2026 9:39 AM (IST)
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बंगाल चुनाव: सीपीएम और आईएसएफ में नहीं बनी बात, यहां फंस गया गठबंधन का पेंच

Bengal News: आईएसएफ की मांग पर अगर माकपा इन सीटों को छोड़ देती हैं, तो सीपीएम धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपना अस्तित्व खो देगी. विभिन्न क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने पहले ही नेतृत्व को इस बारे में बता दिया है.Also Read:

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Bengal News: कोलकाता : बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक है. भाजपा और तृणमूल चुनावी मोड में आ चुके हैं, लेकिन वाम मोर्चा अब तक गठबंधन का साथी ही तलाश रहा है. इसके लिए वाम नेताओं की विभिन्न दलों के साथ बैठकें चरणबद्ध तरीके से हो रही है. वाम मोर्चा किसके साथ गठबंधन करेगी, इसका जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. आईएसएफ प्रमुख नौशाद सिद्दीकी और माकपा नेता बिमान बसु की लगातार मुलाकात हो रही है. गुरुवार को भी दोनों नेताओं के बीच घंटों चली बैठक बेनतीजा खत्म हुई. हालांकि बातचीत आगे भी जारी रहने की बात कही गयी है. अलीमुद्दीन स्ट्रीट के प्रबंधक भी कार्यकर्ताओं की मांगों पर विचार कर रहे हैं।

पहले से अधिक सीट चाहती है आईएसएफ

बैठक के संबंध में बताया जाता है कि बिमान और नौशाद की गुरुवार को अलीमुद्दीन में हुई लगभग ढाई घंटे तक बैठक में सीटों को लेकर पेंच फंसा रहा. हालांकि दोनों पक्षों का कहना है कि वामपंथी दल और आईएसएफ के बीच गठबंधन निश्चित है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर एक पेचीदगी है. इस पेंच को भी जल्द ही सुलझा लिया जायेगा. यह पहले से ही ज्ञात है कि आईएसएफ इस बार पहले से अधिक सीटें चाह रही है. वामपंथी और आईएसएफ गठबंधन 31-32 और 43-44 के फॉर्मूले पर अटका हुआ है. अगर माकपा इन सीटों को छोड़ देती हैं, तो सीपीएम धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपना अस्तित्व खो देगी. विभिन्न क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने पहले ही नेतृत्व को इस बारे में बता दिया है.

जल्द गठबंधन पर फैसला चाहती है आईएसएफ

आईएसएफ विधायक गठबंधन वार्ता को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहते हैं. उन्होंने गठबंधन वार्ता को जल्द से जल्द पूरा करने की पहल की है. आईएसएफ ने 43 से 44 सीटों पर चुनाव लड़ने की अनुमति की मांग की है, लेकिन सीपीएम 32 से अधिक सीटें छोड़ने को तैयार नहीं है. नतीजतन, गठबंधन फिलहाल इसी समझौते पर अटका हुआ है. वाम मोर्चे के अन्य सहयोगी भी उन्हीं सीटों की मांग कर रहे हैं, जिनकी मांग आईएसएफ कर रहा है. इसलिए यह गठबंधन वामपंथी खेमे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. लेकिन कई मामलों में, वास्तव में उन सीटों पर सीपीएम चुनाव लड़ रही है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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