मोथाबाड़ी हिंसा मामले में चार्जशीट दाखिल, एनआइए ने 31 लोगों के खिलाफ पेश किये साक्ष्य

Author Ashish Jha
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मोथाबाड़ी हिंसा की फाइल फोटो

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Bengal News: एसआइआर प्रक्रिया के दौरान हिंसा हुई थी. सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सड़क जाम किया था. पुलिस की मौजूदगी में न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाया गया था.

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Bengal News: मालदा के मोथाबाड़ी में एसआइआर प्रक्रिया के दौरान हुई हिंसा, सड़क जाम और न्यायिक अधिकारियों को रूप से बंधक बनाये जाने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने 31 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. मंगलवार को कोलकाता की विशेष एनआइए अदालत में चार अलग-अलग मामलों में आरोपपत्र पेश किया गया. एनआइए के अधिवक्ता श्यामल घोष ने अदालत को बताया कि घटना के 59 दिनों के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की गयी है. आरोपपत्र में मोफक्केरुल इस्लाम, एकरामुल बागानी समेत कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया है.

न्यायिक अधिकारियों के साथ हुआ था दुर्व्यवहार

यह मामला विधानसभा चुनाव से पहले उस समय सामने आया था, जब एसआइआर के तहत दस्तावेजों की जांच के लिए पहुंचे न्यायिक अधिकारियों को मोथाबाड़ी में एक भीड़ ने घेर लिया था. आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा. उस समय महिला अधिकारी भी ड्यूटी पर मौजूद थीं. इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर सड़क जाम कर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप भी लगाये गये थे. एनआइए के अनुसार, जांच के दौरान डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्य, दस्तावेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण सबूत एकत्र किये गये.

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सभी आरोपितों का साक्ष्य के आधार पर भूमिका स्पष्ट

एजेंसी का दावा है कि एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई है. जांच में पाया गया कि आरोपी संगठित रूप से गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बने, सड़कों को अवरुद्ध किया, सरकारी अधिकारियों की आवाजाही रोकी और चुनावी प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों के कार्य में बाधा पहुंचायी. चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 तथा पश्चिम बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाये गये हैं. एनआइए का कहना है कि इन घटनाओं से न केवल सरकारी कार्य प्रभावित हुआ, बल्कि कानून-व्यवस्था तथा संवैधानिक प्रक्रियाओं के संचालन में भी व्यवधान उत्पन्न हुआ.

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