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कोलकाता-हावड़ा में वायु गुणवत्ता अब भी खराब

Updated at : 22 Oct 2025 11:24 PM (IST)
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कोलकाता-हावड़ा में वायु गुणवत्ता अब भी खराब

कोलकाता और हावड़ा शहर में बुधवार सुबह भी वायु गुणवत्ता खराब रही. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूबीपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि जादवपुर स्थित वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 200 (पीएम 2.5) और बल्लीगंज में 141 (पीएम 2.5) था. सिंथी क्षेत्र में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में एक्यूआइ 142 दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता के निकट स्थित न्यूटाउन में यह 165 था.

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कोलकाता.

कोलकाता और हावड़ा शहर में बुधवार सुबह भी वायु गुणवत्ता खराब रही. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूबीपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि जादवपुर स्थित वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 200 (पीएम 2.5) और बल्लीगंज में 141 (पीएम 2.5) था. सिंथी क्षेत्र में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में एक्यूआइ 142 दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता के निकट स्थित न्यूटाउन में यह 165 था. उन्होंने बताया कि सुबह नौ बजे फोर्ट विलियम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 था, जबकि निकटवर्ती हरित क्षेत्र विक्टोरिया में वायु गुणवत्ता सूचकांक 242 रहा. रवींद्र सरोवर वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे एक्यूआइ 128 दर्ज किया गया.

मंगलवार को जादवपुर में एक्यूआइ 207 था, जबकि बल्लीगंज में यह 213 था, जो सोमवार आधी रात के क्रमशः 159 और 134 से काफी अधिक है. मंगलवार आधी रात को हावड़ा के बेलूर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 213 था, जबकि हावड़ा के शिवपुर बॉटेनिकल गार्डन क्षेत्र के कथित हरित बफर क्षेत्र में भी यह 195 था. हावड़ा के औद्योगिक शहर घुसुड़ी में सुबह नौ बजे एक्यूआइ 179 दर्ज किया गया. वायु गुणवत्ता सूचकांक 151 से 200 के बीच ‘खराब’, 201 से 300 के बीच ‘बहुत खराब’ और 300 से ऊपर ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है. पर्यावरणविदों ने दावा किया कि सोमवार और मंगलवार को महानगर में आधी रात तक पटाखे फोड़े जाने के कारण हवा में महीन प्रदूषक कण घुल गये.

एक्यूआइ बिगड़ने के लिए सीधे तौर पर पटाखे जिम्मेदार नहीं

डब्ल्यूबीपीसीबी के अधिकारी ने कहा, ‘‘एक्यूआइ के बिगड़ने को सीधे तौर पर पटाखे फोड़ने से नहीं जोड़ा जा सकता. एक्यूआइ पिछले साल से कम है. इसके अलावा नीरी द्वारा अनुमोदित हरित पटाखों का ज्यादातर इस्तेमाल किया गया.’ अधिकारी ने कहा, ‘‘एक्यूआइ में किसी भी तरह की गिरावट के लिए मौसम को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, क्योंकि बारिश या दक्षिणी हवाओं के अभाव में गर्म और आर्द्र परिस्थितियों के बीच प्रदूषक हवा में मौजूद रहते हैं.’ उन्होंने कहा कि वे परिणामों का विश्लेषण कर रहे हैं. पर्यावरणविद सोमेंद्र मोहन घोष ने आरोप लगाया कि कोलकाता और हावड़ा में सोमवार और मंगलवार की शाम को आधी रात तक तेज आवाज वाले पटाखे फोड़े गये, जो पीसीबी द्वारा दी गयी रात आठ बजे से 10 बजे तक की समय-सीमा से कहीं अधिक था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIJAY KUMAR

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BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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